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==तीर्थ माहात्म्य॥ Tirtha Mahatmya==
==तीर्थ माहात्म्य॥ Tirtha Mahatmya==
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सनातन परम्परा में तीर्थों का महत्व बहुत प्राचीन काल से ही रहा है। वैदिक साहित्य में तीर्थ शब्द का प्रयोग पवित्र स्थान के अर्थ में हुआ है। रामायण एवं महाभारत में भी तीर्थों का माहात्म्य अधिक था। महाभारत में तो आदि से अंत तक सम्पूर्ण ग्रन्थ में तीर्थों का वर्णन मिलता है। पुलस्त्य-भीष्म संवाद, गौतम-आंगिरस-संवाद तथा भीष्म-युधिष्ठिर संवाद में तीर्थों का माहात्म्य एवं फल का विस्तृत वर्णन है।<ref>डॉ० राजाराम हजारी, [https://www.exoticindiaart.com/book/details/pilgrimage-in-ancient-india-nzi854/ प्राचीन भारत में तीर्थ], सन् २००३, शारदा पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली (पृ० ०२)।</ref>
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तीर्थों में जाने एवं वहाँ दान आदि करने का अत्यधिक माहात्म्य शास्त्रों में वर्णित है जिसका प्रमाण अनेक ग्रन्थों में उपलब्ध होता है। किन्तु यहाँ तीर्थ-माहात्म्य के संकेत के लिए संक्षेप में उनका निरूपण किया जा रहा है - <blockquote>अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्टाविपुलदक्षिणैः। न तत् फलमवाप्नोति तीर्थाभिगमनेन यत्॥
तीर्थों में जाने एवं वहाँ दान आदि करने का अत्यधिक माहात्म्य शास्त्रों में वर्णित है जिसका प्रमाण अनेक ग्रन्थों में उपलब्ध होता है। किन्तु यहाँ तीर्थ-माहात्म्य के संकेत के लिए संक्षेप में उनका निरूपण किया जा रहा है - <blockquote>अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्टाविपुलदक्षिणैः। न तत् फलमवाप्नोति तीर्थाभिगमनेन यत्॥