Changes

Jump to navigation Jump to search
Line 68: Line 68:  
;# Kalaateeta (कालातीतः) ॥ Mis-timed or delayed hetu. कालात्ययापदिष्टः कालातीतः ॥ ९॥ {कालातीतलक्षणम्}
 
;# Kalaateeta (कालातीतः) ॥ Mis-timed or delayed hetu. कालात्ययापदिष्टः कालातीतः ॥ ९॥ {कालातीतलक्षणम्}
   −
; 14. '''च्छलः ॥ Chhala (Minor criticism)''': It consists in opposing a proposition by assigning to it a meaning other than the one intended. It is of three kinds.
+
; 14. '''च्छलः ॥ Chhala (Minor deception)''': It consists in opposing a proposition by assigning to it a meaning other than the one intended. It is of three kinds.
 
<blockquote>वचनविघातः अर्थविकल्पोपपत्त्या छलम् ॥१०॥{छललक्षणम्} (Nyay. Sutr. 1.2.10)<ref name=":0" /> </blockquote><blockquote>तत्त्रिविधं वाक्छलं सामान्यच्छलं उपचारच्छलं च इति ॥११॥ {छलभेदौद्देशसूत्रम्}</blockquote>
 
<blockquote>वचनविघातः अर्थविकल्पोपपत्त्या छलम् ॥१०॥{छललक्षणम्} (Nyay. Sutr. 1.2.10)<ref name=":0" /> </blockquote><blockquote>तत्त्रिविधं वाक्छलं सामान्यच्छलं उपचारच्छलं च इति ॥११॥ {छलभेदौद्देशसूत्रम्}</blockquote>
;# Vakchhala <blockquote>अविशेषाभिहिते अर्थे वक्तुः अभिप्रायातर्थान्तरकल्पना वाक्छलम् ॥१२॥ {वाक्छललक्षणम्}</blockquote>
+
;# Vakchhala <blockquote>Consists in assuming a meaning other than that intended to be conveyed by a word अविशेषाभिहिते अर्थे वक्तुः अभिप्रायातर्थान्तरकल्पना वाक्छलम् ॥१२॥ {वाक्छललक्षणम्}</blockquote>
;# Samanya chhala <blockquote>सम्भवतः अर्थस्य अतिसामान्ययोगातसम्भूतार्थकल्पना सामान्यच्छलम् ॥१३॥ {सामान्यच्छललक्षणम्} </blockquote>
+
;# Samanya chhala <blockquote>Generalizing form of chhala consists in the urging of an absurd signification, which is rendered possible by the use of a too generic term. सम्भवतः अर्थस्य अतिसामान्ययोगातसम्भूतार्थकल्पना सामान्यच्छलम् ॥१३॥ {सामान्यच्छललक्षणम्} </blockquote>
 
;# Upachara Chhala <blockquote>धर्मविकल्पनिर्देशे अर्थसद्भावप्रतिषेधः उपचारच्छलम् ॥१४॥ {उपचारच्छललक्षणम्}</blockquote>
 
;# Upachara Chhala <blockquote>धर्मविकल्पनिर्देशे अर्थसद्भावप्रतिषेधः उपचारच्छलम् ॥१४॥ {उपचारच्छललक्षणम्}</blockquote>
   −
; 15. '''जातिः ॥ Jati (Refutation)''':  
+
; 15. '''जातिः ॥ Jati (Refutation)''': Refutation is that objection which is taken on the basis of mere similarity and dissimilarity.
साधर्म्यवैधर्म्याभ्यां प्रत्यवस्थानं जातिः ॥ १८ ॥ {जातिलक्षणम्}  
+
<blockquote>साधर्म्यवैधर्म्याभ्यां प्रत्यवस्थानं जातिः॥१८॥ {जातिलक्षणम्}</blockquote>
; 16. '''निग्रहस्थान ॥ Nigrahasthana (Points of opponent's defeat)''' :  
+
; 16. '''निग्रहस्थानम् ॥ Nigrahasthana (Points of opponent's defeat)''' : Nigrahastana is when there is Misapprehension and Incomprehension. Misapprehension is that comprehension which is either wrong or reprehensible. Incomprehension is when a person does not say anything in the instance where it is required of him to say so. Both these leads a man to defeat.
विप्रतिपत्तिः अप्रतिपत्तिः च निग्रहस्थानम् ॥ १९ ॥ {निग्रहस्थानलक्षणम्}  तद्विकल्पात्जातिनिग्रहस्थानबहुत्वम् ॥ २० ॥ {निग्रहस्थानबहुत्वसूत्रम्}
+
<blockquote>विप्रतिपत्तिः अप्रतिपत्तिः च निग्रहस्थानम् ॥१९॥ {निग्रहस्थानलक्षणम्}  तद्विकल्पात्जातिनिग्रहस्थानबहुत्वम् ॥२०॥ {निग्रहस्थानबहुत्वसूत्रम्}</blockquote>
    
== Vaiseshika Padarthas ==
 
== Vaiseshika Padarthas ==
6 Padarthas definition and [https://archive.org/details/thevaiasesikasut00kanauoft/page/8 translation]
+
6 Padarthas definition and translation
    
धर्मविशेष प्रसूतात् द्रव्यगुणकर्मसामान्य विशेषसमवायानां पदार्थानां साधर्म्यवैधर्म्याभ्यां तत्त्वज्ञानान्निःश्रेयसम् । वैशेषिक-१,१.४ ।
 
धर्मविशेष प्रसूतात् द्रव्यगुणकर्मसामान्य विशेषसमवायानां पदार्थानां साधर्म्यवैधर्म्याभ्यां तत्त्वज्ञानान्निःश्रेयसम् । वैशेषिक-१,१.४ ।

Navigation menu