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भारतीय परम्परा में अन्न, औषध और विद्या कभी क्रयविक्रय के पदार्थ नहीं रहे । इस परम्परा को पुनर्जीवित करते हुए इस विद्यापीठ में अध्ययन करने वाले छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायेगा।
 
भारतीय परम्परा में अन्न, औषध और विद्या कभी क्रयविक्रय के पदार्थ नहीं रहे । इस परम्परा को पुनर्जीवित करते हुए इस विद्यापीठ में अध्ययन करने वाले छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायेगा।
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फिर भी अन्यान्य व्यवस्थाओं के लिये धन की आवश्यकता तो रहेगी । अतः यह विद्यापीठ सर्वार्थ में समाजपोषित होगा ।
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तथापि अन्यान्य व्यवस्थाओं के लिये धन की आवश्यकता तो रहेगी । अतः यह विद्यापीठ सर्वार्थ में समाजपोषित होगा ।
    
विद्यापीठ में सादगी, श्रमनिष्ठा एवं अर्थसंयम का पक्ष महत्त्वपूर्ण रहेगा ।  सुविधा का ध्यान रखा जायेगा, वैभवबिलासिता का नहीं ।
 
विद्यापीठ में सादगी, श्रमनिष्ठा एवं अर्थसंयम का पक्ष महत्त्वपूर्ण रहेगा ।  सुविधा का ध्यान रखा जायेगा, वैभवबिलासिता का नहीं ।

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