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'''प्रश्न १३  इतिहास, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषय न कोई पढना चाहता है न पढाना । इसके क्या परिणाम हो सकते हैं ? इन्हें नहीं पढने से क्या हानि है ?'''
 
'''प्रश्न १३  इतिहास, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषय न कोई पढना चाहता है न पढाना । इसके क्या परिणाम हो सकते हैं ? इन्हें नहीं पढने से क्या हानि है ?'''
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'''उत्तर'''  
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'''उत्तर''' शिक्षा ज्ञानार्जन के लिये होती है । शिक्षा समष्टि में ज्ञाननिष्ठ व्यवहार करने के लिये होती है । हमारी परम्परा, हमारी संस्कृति, हमारा राष्ट्र, हमारी जीवनदृष्टि की शिक्षा यदि नहीं मिली, हम जीवन के बोध के उच्चतर स्तर तक नहीं पहुँचे तो पशु में और मनुष्य में क्या अन्तर रह जायेगा ? मनुष्य को व्यक्तिगत रूप से सुसंस्कृत बनाने के लिये और समाज को समृद्ध चिरंजीवी और विकसित बनाने के लिये ये विषय आवश्यक होते हैं । इसलिये ये अध्ययन की मुख्य धारा में होने चाहिये । आज इन विषयों को सार्थकता पूर्वक और गहराई से पढ़ाने वाला कोई नहीं रहा क्योंकि दो पीढ़ियों से हमने उनका महत्त्व भुला दिया इसलिये विद्यार्थियों ने पढ़ना छोड दिया । विद्यार्थी नहीं पढ़े इसलिये शिक्षक भी नहीं रहे । उपाय वही है जो गणित, विज्ञान आदि के विषय में बताया है ।
शिक्षा ज्ञानार्जन के लिये होती है । शिक्षा समष्टि में ज्ञाननिष्ठ व्यवहार करने के लिये होती है । हमारी परम्परा,
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हमारी संस्कृति, हमारा राष्ट्र, हमारी जीवनदृष्टि की शिक्षा यदि नहीं मिली, हम जीवन के बोध के उच्चतर स्तर तक
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'''प्रश्न १४''' '''बडे लोगों के बच्चे तो अंग्रेजी माध्यम में पढते हैं परन्तु छोटे लोगों को अंग्रेजी माध्यम की मनाई करते हैं ।
नहीं पहुँचे तो पशु में और मनुष्य में क्या अन्तर रह जायेगा ? मनुष्य को व्यक्तिगत रूप से सुसंस्कृत बनाने के लिये
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क्या आप हमें आगे नहीं बढने देना चाहते हैं ?'''
और समाज को समृद्ध चिरंजीवी और विकसित बनाने के लिये ये विषय आवश्यक होते हैं । इसलिये ये अध्ययन
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की मुख्य धारा में होने चाहिये । आज इन विषयों को सार्थकता पूर्वक और गहराई से पढ़ाने वाला कोई नहीं रहा
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क्योंकि दो पीढ़ियों से हमने उनका महत्त्व भुला दिया इसलिये विद्यार्थियों ने पढ़ना छोड दिया । विद्यार्थी नहीं पढ़े
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इसलिये शिक्षक भी नहीं रहे । उपाय वही है जो गणित, विज्ञान आदि के विषय में बताया है ।
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बडे लोगों के बच्चे तो अंग्रेजी माध्यम में पढते हैं परन्तु छोटे लोगों को अंग्रेजी माध्यम की मनाई करते हैं ।
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क्या आप हमें आगे नहीं बढने देना चाहते हैं ?
   
क्षमा करें । यह छोटे लोगो के लिये नहीं है, तथाकथित बडे लोगों के लिये है क्योंकि आप यदि अपने आपको
 
क्षमा करें । यह छोटे लोगो के लिये नहीं है, तथाकथित बडे लोगों के लिये है क्योंकि आप यदि अपने आपको
 
छोटा मानते हैं तो जो सही है वह नहीं करेंगे, आप जिन्हें बडा मानते हैं उनके जैसा करेंगे।
 
छोटा मानते हैं तो जो सही है वह नहीं करेंगे, आप जिन्हें बडा मानते हैं उनके जैसा करेंगे।
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आप अपने ब्चचों को अंग्रेजी माध्यम में इसलिये पढाना चाहते हैं क्योंकि वे पढाते हैं । कल वे बन्द करेंगे
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आप अपने ब्चचों को अंग्रेजी माध्यम में इसलिये पढाना चाहते हैं क्योंकि वे पढाते हैं । कल वे बन्द करेंगे तो आप भी बन्द करेंगे ।
तो आप भी बन्द करेंगे ।
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इसलिये प्रश्न आपका नहीं, उनका है । उनसे ही परामर्श है कि अंग्रेजी माध्यम में अपने बच्चों को न
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इसलिये प्रश्न आपका नहीं, उनका है । उनसे ही परामर्श है कि अंग्रेजी माध्यम में अपने बच्चों को न पढायें।
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अंग्रेजी से हानि अधिक है, लाभ कुछ भी नहीं । इसलिये समझदार लोग कभी भी अपने बच्चों को अंग्रेजी
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अंग्रेजी से हानि अधिक है, लाभ कुछ भी नहीं । इसलिये समझदार लोग कभी भी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से नहीं पढायेंगे । उल्टा कहें तो जो पढ़ाते हैं वे समझदार नहीं हैं । आप भी उनके जैसे नासमझ हैं क्योंकि
माध्यम से नहीं पढायेंगे । उल्टा कहें तो जो पढ़ाते हैं वे समझदार नहीं हैं । आप भी उनके जैसे नासमझ हैं क्योंकि
   
आप उनका अनुकरण करते हैं ।
 
आप उनका अनुकरण करते हैं ।
सहशिक्षा के बारे में आपका क्या अभिप्राय है ?
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अध्ययन के लिये मन की एकाग्रता, संयम, अनुशासन, सदाचार आदि अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं । यदि ये सब
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नहीं हैं तो अध्ययन सम्भव ही नहीं है । इन सबको यदि एक शब्द में कहना है तो वह शब्द है ब्रह्मचर्य । स्वामी
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विवेकानन्द जैसे अनेक मनीषियों ने शिक्षा के लिये ब्रह्मचर्य की आवश्यकता पर बल दिया है ।
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सह शिक्षा लडके और लडकियाँ दोनों के ब्रह्मचर्य में अवरोध निर्माण करती है । इसलिये वह सराहनीय नहीं
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आज की मानसिकता इससे अत्यन्त विपरीत है यह सही है परन्तु उपाय तो यही है । हम अन्तर्मन में
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ब्रह्मचर्य की रक्षा का महत्त्व समझते हैं इसलिये तो छात्रावास अलग होते हैं, कार्यक्रमों में निवास की व्यवस्था
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अलग होती हैं, बस या रेल में महिलाओं के लिये अलग व्यवस्था होती है ।
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पर्व ५ : विविध
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प्रश्न १६
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उत्तर
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प्रश्न १७
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'''प्रश्न १५ सहशिक्षा के बारे में आपका क्या अभिप्राय है ?'''
उत्तर
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प्रश्न १८
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अध्ययन के लिये मन की एकाग्रता, संयम, अनुशासन, सदाचार आदि अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं । यदि ये सब नहीं हैं तो अध्ययन सम्भव ही नहीं है । इन सबको यदि एक शब्द में कहना है तो वह शब्द है ब्रह्मचर्य । स्वामी विवेकानन्द जैसे अनेक मनीषियों ने शिक्षा के लिये ब्रह्मचर्य की आवश्यकता पर बल दिया है ।
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उत्तर
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सह शिक्षा लडके और लडकियाँ दोनों के ब्रह्मचर्य में अवरोध निर्माण करती है । इसलिये वह सराहनीय नहीं है।
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प्रश्न १९
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आज की मानसिकता इससे अत्यन्त विपरीत है यह सही है परन्तु उपाय तो यही है । हम अन्तर्मन में ब्रह्मचर्य की रक्षा का महत्त्व समझते हैं इसलिये तो छात्रावास अलग होते हैं, कार्यक्रमों में निवास की व्यवस्था अलग होती हैं, बस या रेल में महिलाओं के लिये अलग व्यवस्था होती है ।
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उत्तर
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हमें लगता है महिलाओं को ही पुरुषों से भय है इसलिये महिलाओं की सुरक्षा करो । परन्तु सुरक्षा तो पुरुषों के ब्रह्मचर्य की भी करनी चाहिये |
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हमें लगता है महिलाओं को ही पुरुषों से भय है इसलिये महिलाओं की सुरक्षा करो
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विवाह होने तक न केवल शारीरिक अपितु मानसिक ब्रह्मचर्य की भी आवश्यकता होती है । इसकी रक्षा हो सके इस दृष्टि से सहशिक्षा नहीं होना अच्छा है ।
परन्तु सुरक्षा तो पुरुषों के ब्रह्मचर्य की भी करनी चाहिये |
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विवाह होने तक न केवल शारीरिक अपितु मानसिक ब्रह्मचर्य की भी आवश्यकता होती है । इसकी रक्षा हो
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'''प्रश्न १६ आजकल बच्चे बहुत स्मार्ट हो गये हैं फिर उन्हें पाँच वर्ष की आयु तक क्यों नहीं पढाना चाहिये ?'''
सके इस दृष्टि से सहशिक्षा नहीं होना अच्छा है ।
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आजकल बच्चे बहुत स्मार्ट हो गये हैं फिर उन्हें पाँच वर्ष की आयु तक क्यों नहीं पढाना चाहिये ?
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एक अभिभावक का प्रश्न
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'''एक अभिभावक का प्रश्न'''
    
मोबाइल, टीवी, संगणक चलाने को, किसी के सामने नहीं शरमाने को, चबर-चबर बोलने को, विज्ञापन की
 
मोबाइल, टीवी, संगणक चलाने को, किसी के सामने नहीं शरमाने को, चबर-चबर बोलने को, विज्ञापन की
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