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'''उत्तर'''  शिक्षा ज्ञानार्जन के लिये होती है । शिक्षा समष्टि में ज्ञाननिष्ठ व्यवहार करने के लिये होती है । हमारी परम्परा, हमारी संस्कृति, हमारा राष्ट्र, हमारी जीवनदृष्टि की शिक्षा यदि नहीं मिली, हम जीवन के बोध के उच्चतर स्तर तक नहीं पहुँचे तो पशु में और मनुष्य में क्या अन्तर रह जायेगा ? मनुष्य को व्यक्तिगत रूप से सुसंस्कृत बनाने के लिये और समाज को समृद्ध चिरंजीवी और विकसित बनाने के लिये ये विषय आवश्यक होते हैं । इसलिये ये अध्ययन की मुख्य धारा में होने चाहिये । आज इन विषयों को सार्थकता पूर्वक और गहराई से पढ़ाने वाला कोई नहीं रहा क्योंकि दो पीढ़ियों से हमने उनका महत्त्व भुला दिया इसलिये विद्यार्थियों ने पढ़ना छोड दिया । विद्यार्थी नहीं पढ़े इसलिये शिक्षक भी नहीं रहे । उपाय वही है जो गणित, विज्ञान आदि के विषय में बताया है ।
 
'''उत्तर'''  शिक्षा ज्ञानार्जन के लिये होती है । शिक्षा समष्टि में ज्ञाननिष्ठ व्यवहार करने के लिये होती है । हमारी परम्परा, हमारी संस्कृति, हमारा राष्ट्र, हमारी जीवनदृष्टि की शिक्षा यदि नहीं मिली, हम जीवन के बोध के उच्चतर स्तर तक नहीं पहुँचे तो पशु में और मनुष्य में क्या अन्तर रह जायेगा ? मनुष्य को व्यक्तिगत रूप से सुसंस्कृत बनाने के लिये और समाज को समृद्ध चिरंजीवी और विकसित बनाने के लिये ये विषय आवश्यक होते हैं । इसलिये ये अध्ययन की मुख्य धारा में होने चाहिये । आज इन विषयों को सार्थकता पूर्वक और गहराई से पढ़ाने वाला कोई नहीं रहा क्योंकि दो पीढ़ियों से हमने उनका महत्त्व भुला दिया इसलिये विद्यार्थियों ने पढ़ना छोड दिया । विद्यार्थी नहीं पढ़े इसलिये शिक्षक भी नहीं रहे । उपाय वही है जो गणित, विज्ञान आदि के विषय में बताया है ।
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'''प्रश्न १४''' '''बडे लोगों के बच्चे तो अंग्रेजी माध्यम में पढते हैं परन्तु छोटे लोगों को अंग्रेजी माध्यम की मनाई करते हैं ।
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'''प्रश्न १४''' '''बडे लोगों के बच्चे तो अंग्रेजी माध्यम में पढते हैं परन्तु छोटे लोगों को अंग्रेजी माध्यम की मनाई करते हैं ।'''
क्या आप हमें आगे नहीं बढने देना चाहते हैं ?'''
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क्या आप हमें आगे नहीं बढने देना चाहते हैं ?
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क्षमा करें । यह छोटे लोगो के लिये नहीं है, तथाकथित बडे लोगों के लिये है क्योंकि आप यदि अपने आपको
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'''उत्तर''' क्षमा करें । यह छोटे लोगो के लिये नहीं है, तथाकथित बडे लोगों के लिये है क्योंकि आप यदि अपने आपको
 
छोटा मानते हैं तो जो सही है वह नहीं करेंगे, आप जिन्हें बडा मानते हैं उनके जैसा करेंगे।
 
छोटा मानते हैं तो जो सही है वह नहीं करेंगे, आप जिन्हें बडा मानते हैं उनके जैसा करेंगे।
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'''प्रश्न १५ सहशिक्षा के बारे में आपका क्या अभिप्राय है ?'''
 
'''प्रश्न १५ सहशिक्षा के बारे में आपका क्या अभिप्राय है ?'''
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अध्ययन के लिये मन की एकाग्रता, संयम, अनुशासन, सदाचार आदि अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं । यदि ये सब नहीं हैं तो अध्ययन सम्भव ही नहीं है । इन सबको यदि एक शब्द में कहना है तो वह शब्द है ब्रह्मचर्य । स्वामी विवेकानन्द जैसे अनेक मनीषियों ने शिक्षा के लिये ब्रह्मचर्य की आवश्यकता पर बल दिया है ।
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'''उत्तर''' अध्ययन के लिये मन की एकाग्रता, संयम, अनुशासन, सदाचार आदि अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं । यदि ये सब नहीं हैं तो अध्ययन सम्भव ही नहीं है । इन सबको यदि एक शब्द में कहना है तो वह शब्द है ब्रह्मचर्य । स्वामी विवेकानन्द जैसे अनेक मनीषियों ने शिक्षा के लिये ब्रह्मचर्य की आवश्यकता पर बल दिया है ।
    
सह शिक्षा लडके और लडकियाँ दोनों के ब्रह्मचर्य में अवरोध निर्माण करती है । इसलिये वह सराहनीय नहीं है।  
 
सह शिक्षा लडके और लडकियाँ दोनों के ब्रह्मचर्य में अवरोध निर्माण करती है । इसलिये वह सराहनीय नहीं है।  
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'''एक अभिभावक का प्रश्न'''
 
'''एक अभिभावक का प्रश्न'''
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मोबाइल, टीवी, संगणक चलाने को, किसी के सामने नहीं शरमाने को, चबर-चबर बोलने को, विज्ञापन की
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'''उत्तर''' मोबाइल, टीवी, संगणक चलाने को, किसी के सामने नहीं शरमाने को, चबर-चबर बोलने को, विज्ञापन की अभिनय सहित हूबहू नकल करने को हम स्मार्टनेस कहते हैं । यह स्मार्टनेस नहीं है, छिछलापन है जो बच्चों में
अभिनय सहित हूबहू नकल करने को हम स्मार्टनेस कहते हैं । यह स्मार्टनेस नहीं है, छिछलापन है जो बच्चों में
   
होता है इसलिये हमें अखरता नहीं है परन्तु बडे बच्चे यदि ऐसे हैं तो हमें परेशानी होती है ।
 
होता है इसलिये हमें अखरता नहीं है परन्तु बडे बच्चे यदि ऐसे हैं तो हमें परेशानी होती है ।
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स्मार्ट होने से भी बुद्धिमान, स्थिर और शान्त होना आवश्यक है । स्मार्टनेस के लिये हमारे शाख््र में बहुत
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स्मार्ट होने से भी बुद्धिमान, स्थिर और शान्त होना आवश्यक है । स्मार्टनेस के लिये हमारे शास्त्र बहुत अच्छा शब्द है । वह है प्रत्युत्पन्नमतित्व अर्थात्‌ त्वरित बुद्धि वाला, सहज बुद्धिवाला । सामान्य भाषा में शब्द हैं चतुर । चतुराई हमेशा सराहनीय ही होती है ऐसा नहीं है ।
अच्छा शब्द है । वह है प्रत्युत्पन्नमतित्व अर्थात्‌ त्वरित बुद्धि वाला, सहज बुद्धिवाला । सामान्य भाषा में शब्द हैं
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चतुर । चतुराई हमेशा सराहनीय ही होती है ऐसा नहीं है ।
      
अतः प्रथम तो स्मार्टनेस की ही चिन्ता करें । स्मार्ट है इसलिये जल्दी पढ़ाने का तो सवाल ही नहीं है ।
 
अतः प्रथम तो स्मार्टनेस की ही चिन्ता करें । स्मार्ट है इसलिये जल्दी पढ़ाने का तो सवाल ही नहीं है ।
विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे रखने का क्या प्रयोजन है ?
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विद्यालय यदि बडा है तो मुख्याध्यापक को कहाँ कया हो रहा है इसकी जानकारी अपने स्थान पर ही बैठे हुए
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मिलती रहे यही उसका मूल प्रयोजन है । कोई बाहर का व्यक्ति, कोई आवांछनीय व्यक्ति विद्यालय में न घुसे
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इसकी सावधानी भी इससे रखी जाती है । परन्तु इस व्यवस्था का दुरुपयोग मनुष्य का मन और बुद्धि कर ही लेते
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हैं । इसलिये कक्षाकक्षों में शिक्षक और विद्यार्थियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिये इसका महत्तम उपयोग
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किया जाता है । विद्यार्थी यह खूब जानते हैं इसलिये उससे बचने के उपाय भी खोज लेते हैं और जो करना है कर
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लेते हैं ।
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इतने प्रभावी दृश्यश्राव्य उपकरण हैं फिर शिक्षक की क्या आवश्यकता है ?
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'एक संचालक का प्रश्न
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'''प्रश्न १७  विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे रखने का क्या प्रयोजन है ?'''
घर में आपके सब काम करने वाला और आपके साथ मीठी बातें भी करने वाला रोबोट है तो फिर पत्नी, पुत्र
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आदि की क्‍या आवश्यकता है ? आप तुरन्त कहेंगे कि जीवन जीवित लोगों के साथ जीया जाता है, यन्त्रों के
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साथ नहीं । शिक्षा का भी ऐसा ही है । शिक्षा जीवित लोगों के मध्य होने वाला व्यवहार है, यन्त्रों और मनुष्यों के
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बीच होने वाला नहीं । यन्त्र हमारे सहायक हो सकते हैं, हमारा स्थान नहीं ले सकते हैं ।
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जो लोग शिक्षा को यान्त्रिक व्यवस्था के हवाले कर रहे हैं उनकी सोच इस प्रकार की बनती है, परन्तु जो
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'''उत्तर''' विद्यालय यदि बडा है तो मुख्याध्यापक को कहाँ कया हो रहा है इसकी जानकारी अपने स्थान पर ही बैठे हुए मिलती रहे यही उसका मूल प्रयोजन है । कोई बाहर का व्यक्ति, कोई आवांछनीय व्यक्ति विद्यालय में न घुसे इसकी सावधानी भी इससे रखी जाती है । परन्तु इस व्यवस्था का दुरुपयोग मनुष्य का मन और बुद्धि कर ही लेते हैं । इसलिये कक्षाकक्षों में शिक्षक और विद्यार्थियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिये इसका महत्तम उपयोग किया जाता है विद्यार्थी यह खूब जानते हैं इसलिये उससे बचने के उपाय भी खोज लेते हैं और जो करना है कर लेते हैं ।
आत्मीयता, प्रेरणा, श्रद्धा, निष्ठा, मूल्य चरित्र, सदूगुणविकास आदि का महत्त्व जानते हैं वे कभी भी शिक्षक के स्थान
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पर यन्त्र नहीं लायेंगे
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दुनिया टेबलेट की ओर जा रही है और आप स्लेट की बात कर रहे हैं । कौन इसे स्वीकार कर सकता है ?
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एक अभिभावक का प्रश्न
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'''प्रश्न १८  इतने प्रभावी दृश्यश्राव्य उपकरण हैं फिर शिक्षक की क्या आवश्यकता है ?'''
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जो बुद्धिमान होगा वह स्लेट के पक्ष में खडा रहेगा । खूब पैसा खर्च करना, विद्युत का प्रयोग करना, हाथ और
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'''<nowiki/>'एक संचालक का प्रश्न'''
मस्तिष्क को कोई कम नहीं देना यह टेबलेट है जबकि उससे सौ गुना कम दाम में स्लेट आती है जिस पर हाथ से
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घर में आपके सब काम करने वाला और आपके साथ मीठी बातें भी करने वाला रोबोट है तो फिर पत्नी, पुत्र आदि की क्‍या आवश्यकता है ? आप तुरन्त कहेंगे कि जीवन जीवित लोगों के साथ जीया जाता है, यन्त्रों के साथ नहीं । शिक्षा का भी ऐसा ही है । शिक्षा जीवित लोगों के मध्य होने वाला व्यवहार है, यन्त्रों और मनुष्यों के बीच होने वाला नहीं । यन्त्र हमारे सहायक हो सकते हैं, हमारा स्थान नहीं ले सकते हैं ।
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जो लोग शिक्षा को यान्त्रिक व्यवस्था के हवाले कर रहे हैं उनकी सोच इस प्रकार की बनती है, परन्तु जो आत्मीयता, प्रेरणा, श्रद्धा, निष्ठा, मूल्य चरित्र, सदूगुणविकास आदि का महत्त्व जानते हैं वे कभी भी शिक्षक के स्थान पर यन्त्र नहीं लायेंगे ।
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'''प्रश्न १९ दुनिया टेबलेट की ओर जा रही है और आप स्लेट की बात कर रहे हैं । कौन इसे स्वीकार कर सकता है ?'''
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'''एक अभिभावक का प्रश्न'''
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जो बुद्धिमान होगा वह स्लेट के पक्ष में खडा रहेगा । खूब पैसा खर्च करना, विद्युत का प्रयोग करना, हाथ और मस्तिष्क को कोई कम नहीं देना यह टेबलेट है जबकि उससे सौ गुना कम दाम में स्लेट आती है जिस पर हाथ से
 
लिखना और बुद्धि में बिठाना है । पुस्तक का भी ऐसा ही है ।
 
लिखना और बुद्धि में बिठाना है । पुस्तक का भी ऐसा ही है ।
  
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