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== मन का दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व ==
 
== मन का दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक महत्त्व ==
शिवसंकल्प सूक्त के अनुसार मन इन्द्रियों का प्रवर्तक, ज्ञान का आधार तथा समस्त क्रियाओं का प्रेरक तत्त्व है। इन्द्रियाँ तभी अपने विषयों का सम्यक् ग्रहण कर सकती हैं, जब मन संतुलित एवं नियंत्रित हो। कठोपनिषद् के रथ-दृष्टान्त द्वारा यह सिद्ध किया गया है कि विवेकयुक्त बुद्धि, संयमित मन और नियंत्रित इन्द्रियाँ ही जीवन को परम लक्ष्य की ओर ले जाती हैं। इस प्रकार शिवसंकल्प, मन-नियंत्रण का वैदिक सूत्र प्रदान करता है।  
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शिवसंकल्प सूक्त के अनुसार मन इन्द्रियों का प्रवर्तक, ज्ञान का आधार तथा समस्त क्रियाओं का प्रेरक तत्त्व है। इन्द्रियाँ तभी अपने विषयों का सम्यक् ग्रहण कर सकती हैं, जब मन संतुलित एवं नियंत्रित हो। कठोपनिषद् के रथ-दृष्टान्त द्वारा यह सिद्ध किया गया है कि विवेकयुक्त बुद्धि, संयमित मन और नियंत्रित इन्द्रियाँ ही जीवन को परम लक्ष्य की ओर ले जाती हैं। इस प्रकार शिवसंकल्प, मन-नियंत्रण का वैदिक सूत्र प्रदान करता है।<ref>स्वामी श्री अखंडानन्द सरस्वती - [https://ia800507.us.archive.org/29/items/shivsankalp_sukta/shivsankalp_sukta_text.pdf शिवसंकल्प-सूक्त]</ref>
    
==निष्कर्ष॥ Conclusion==
 
==निष्कर्ष॥ Conclusion==
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