Changes

Jump to navigation Jump to search
सुधार जारी
Line 40: Line 40:     
== नीतिशास्त्र और राजनीति का संबंध==
 
== नीतिशास्त्र और राजनीति का संबंध==
संस्कृत साहित्य में वैदिक युग से ही नीति परक उपदेशों की परम्परा चली आ रही है, जिसमें विभिन्न मनुष्य ने अपने अनुसार नीति कथाओं एवं वचनों के वर्णन किये गये हैं। वस्तुतः नीति के उद्भावक भगवान् ब्रह्मा और प्रतिष्ठापक विष्णु हैं। आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक नीतियों का अत्यधिक प्रचार हुआ है। जिनमें नीतिशास्त्र से संबंधित कुछ प्रमुख ग्रन्थ इस प्रकार हैं -  
+
संस्कृत साहित्य में वैदिक युग से ही नीति परक उपदेशों की परम्परा चली आ रही है, जिसमें विभिन्न मनुष्य ने अपने अनुसार नीति कथाओं एवं वचनों के वर्णन किये गये हैं। वस्तुतः नीति के उद्भावक भगवान् ब्रह्मा और प्रतिष्ठापक विष्णु हैं। आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक नीतियों का अत्यधिक प्रचार हुआ है। राजनीति की दृष्टि से भी नीति-शास्त्र का अपार महत्व है -<ref>डॉ० गंगाधर भट्ट, [https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.539089/page/n24/mode/1up संस्कृत काव्य में नीति-तत्व], सन् १९७१, बाफना प्रकाशन, जयपुर (पृ० १३)।</ref>  <blockquote>अत सदा नीतिशास्त्रमभ्यसेद्यत्न तो नृपः। यद्विज्ञानान्नृपाद्याश्च शत्रुजिल्लोक रञ्जका॥ (शुक्रनीति) </blockquote>नीति-शास्त्र का सम्यक् अध्ययन एवं पूर्ण परिज्ञान करना राजा के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। नीति-निष्णात राजा एवं मन्त्री शत्रुओं के जेता एवं जगत के प्रीति पात्र माने जाते हैं। जिनमें नीतिशास्त्र से संबंधित कुछ प्रमुख ग्रन्थ इस प्रकार हैं -  
    
*'''विदुर नीति'''
 
*'''विदुर नीति'''
1,075

edits

Navigation menu