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नगरद्वय राजस्थान के प्रमुख नगरहैं और राजपूतीइतिहास के साक्षी हैं। यहाँ (कोटा) का पुराना राजवंश वल्लभ सम्प्रदाय में दीक्षित रहा है। अतः यहाँ वल्लभ सम्प्रदाय के कई पुराने व सुन्दर मन्दिर हैं।पुराने किले में भी मधुरेश, श्री नवनीतप्रिया, बालकृष्ण आदि मन्दिरहैं। नगर के पूर्व में किशोर सागर नामक पवित्र सरोवर हैं। भीमताल, क्षेमकरी देवी मन्दिर, रामेश्वर आदि बून्दी के समीपवर्ती धार्मिक स्थान हैं।
नगरद्वय राजस्थान के प्रमुख नगरहैं और राजपूतीइतिहास के साक्षी हैं। यहाँ (कोटा) का पुराना राजवंश वल्लभ सम्प्रदाय में दीक्षित रहा है। अतः यहाँ वल्लभ सम्प्रदाय के कई पुराने व सुन्दर मन्दिर हैं।पुराने किले में भी मधुरेश, श्री नवनीतप्रिया, बालकृष्ण आदि मन्दिरहैं। नगर के पूर्व में किशोर सागर नामक पवित्र सरोवर हैं। भीमताल, क्षेमकरी देवी मन्दिर, रामेश्वर आदि बून्दी के समीपवर्ती धार्मिक स्थान हैं।
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बाथट्टाया
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=== नाथद्वारा ===
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उदयपुर से ४८ कि.मी. दूर बनास नदी पर नाथद्वार स्थित है। यहाँ भगवान् श्रीनाथ का सुन्दर मन्दिर है। श्री नाथजी की प्रतिमा मूलत: वज्रभूमि में गोवर्धन पर प्रतिष्ठित थी। औरंगजेब के शासन के दौरान वहाँ से हटाकर नाथद्वारा मेंप्रस्थापित करा दी गयी। स्वयं महाप्रभु वल्लभाचार्य श्री विग्रह को लेकरआये थे। अत: यह स्थान वल्लभाचार्य के शिष्यों का प्रमुख तीर्थ स्थल है। नाथद्वारा में वनमाली जी का मन्दिर, मीरा मन्दिर, नवनीतलाल जी का मन्दिर तथा अन्य प्रमुख मन्दिरहैं। नाथद्वारा मन्दिर के माध्यम से यहाँ हस्तलिखित व मुद्रित ग्रन्थों का विशाल पुस्तकालय संचालित किया जाता है।
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उदयपुर से 48 कि.मी. दूर बनास नदी पर नाथद्वार स्थित है। यहाँ
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भगवान् श्रीनाथ का सुन्दर मन्दिर है। श्री नाथजी की प्रतिमा मूलत:
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वजभूमि में गोवर्धन पर प्रतिष्ठित थी। औरंगजेब के शासन के दौरान वहाँ
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से हटाकर नाथद्वारा मेंप्रस्थापित करा दी गयी। स्वयं महाप्रभु वल्लभाचार्य
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श्री विग्रह को लेकरआये थे। अत: यह स्थान वल्लभाचार्य के शिष्यों का
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प्रमुख तीर्थ स्थल है। नाथद्वारा में वनमाली जी का मन्दिर, मीरा मन्दिर,
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नवनीतलाल जी का मन्दिर तथा अन्य प्रमुख मन्दिरहैं। नाथद्वारा मन्दिर
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संचालित किया जाता है।
==References==
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