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इन सब प्रश्नों का उत्तर धार्मिक  उपनिषदिक चिंतन में मिलता है।   
 
इन सब प्रश्नों का उत्तर धार्मिक  उपनिषदिक चिंतन में मिलता है।   
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कहा है - प्रारम्भ में केवल परमात्मा ही था। भूमिती में बिन्दु के अस्तित्व का कोई  मापन नहीं हो सकता फिर भी उसका अस्तित्व मान लिया जाता है। इस के माने बिना तो भूमिती का आधार ही नष्ट हो जाता है। इसी तरह सृष्टि को जानना हो तो परमात्मा के स्वरूप को समझना और मानना होगा।   
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कहा है - प्रारम्भ में केवल परमात्मा ही था। भूमिती में बिन्दु के अस्तित्व का कोई  मापन नहीं हो सकता तथापि उसका अस्तित्व मान लिया जाता है। इस के माने बिना तो भूमिती का आधार ही नष्ट हो जाता है। इसी तरह सृष्टि को जानना हो तो परमात्मा के स्वरूप को समझना और मानना होगा।   
    
सृष्टि निर्माण का प्रयोजन भी बताया है – '''‘एकाकी न रमते सो कामयत’''' याने अकेले मन नहीं रमता अतः इच्छा हुई।   
 
सृष्टि निर्माण का प्रयोजन भी बताया है – '''‘एकाकी न रमते सो कामयत’''' याने अकेले मन नहीं रमता अतः इच्छा हुई।   

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