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कल्याणाय च लोकानां प्रयोगो बुद्धिज्ञानयोः ।
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<blockquote>'''कल्याणाय च लोकानां प्रयोगो बुद्धिज्ञानयोः ।'''
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साफल्यं मानवीयस्य जीवनस्येही निश्चितं ।।
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'''साफल्यं मानवीयस्य जीवनस्येही निश्चितं ।।'''</blockquote>जैसा कि उपरोक्त शब्दों से प्रतिध्वनित होता है , इस संस्कार में बालक का मस्तक यह जन्मजात बालों को हटाने की रस्म है। मानव जीवन में सृजन और मूल से जुड़ी पुरानी चीजों का संशोधन, यदि अनावश्यक हो तो करना , यही इस संस्कार का उद्देश्य है। रचनात्मकता के साथ पहले वर्णित सात संस्कार या सृजन प्रक्रिया से संबंधित है। ये अगले संस्कार व्यक्ति से स्वतंत्र हैं अस्तित्व के सार को निर्धारित करने वाली इकाई के रूप में बनाया गया क्या पहचान होती है , वे प्रक्रियाएँ जिनके द्वारा प्रत्येक व्यक्ति उत्तरोत्तर प्रगति करता है बढ़ रहा है। इसलिए ज्वाला और उसके बाद के सभी संस्कारों का किसी व्यक्ति के अंतिम विसर्जन की ओर जाने वाला मार्ग विकासात्मक संस्कार है।
 
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जैसा कि उपरोक्त शब्दों से प्रतिध्वनित होता है , इस संस्कार में बालक का मस्तक यह जन्मजात बालों को हटाने की रस्म है। मानव जीवन में सृजन और मूल से जुड़ी पुरानी चीजों का संशोधन, यदि अनावश्यक हो तो करना , यही इस संस्कार का उद्देश्य है। रचनात्मकता के साथ पहले वर्णित सात संस्कार या सृजन प्रक्रिया से संबंधित है। ये अगले संस्कार व्यक्ति से स्वतंत्र हैं अस्तित्व के सार को निर्धारित करने वाली इकाई के रूप में बनाया गया क्या पहचान होती है , वे प्रक्रियाएँ जिनके द्वारा प्रत्येक व्यक्ति उत्तरोत्तर प्रगति करता है बढ़ रहा है। इसलिए ज्वाला और उसके बाद के सभी संस्कारों का किसी व्यक्ति के अंतिम विसर्जन की ओर जाने वाला मार्ग विकासात्मक संस्कार है।
      
मूल शब्द ' चूड़ाकरण ' है । चूड़ा सिर पर बालों का एक समूह है सभी बाल हटा दें और गाय के खुर जितना पीछे की सतह पर रखें उन्हें बिना ड्राइंग के सर्कल में रहने दिया जाता है। इन बालों को ' शिखा ' कहा जाता है । भारत में प्राचीन काल से ही सिख धर्म का विशेष महत्व रहा है। शिखा (शेंडी) श्रृंगार है  यह प्रतीक नहीं है, यह बौद्धिक विकास से जुड़ा है। भारत में पूर्व-व्यापार विद्वान बुद्धि को विशेष प्राथमिकता दी जाती है , इसलिए जीवन की शुरुआत से ही बुद्धि के जानबूझकर विकास का प्रयास किया गया था। उस ज्ञान से जो अनुभव से आता है भारतीयों ने समझा कि मानव ज्ञान का केंद्र सिर की सतह है। वहीं से सोच , निर्णय लेने और योजना बनाने का जन्म होता है। तो एड़ी के ऊपर सिर सतह के उस विशेष भाग पर बालों को काटे बिना बनाए रखा जाना चाहिए उसने योजना बनाई। इसके अलावा, भारतीयों का दृढ़ विश्वास था कि एक अंतरिक्ष ऊर्जा का प्रकार है। आकाश से जीवों पर सूक्ष्म रूप से वर्षा हुई रूप लगातार प्रभावित कर रहा है। उस ऊर्जा को अवशोषित करना सीखें (शेंडी) तेल बालों के माध्यम से वाहक के रूप में होता है। इससे माथा ठंडा हो जाता है और शिखर को गर्म रखने की धारणा चलती रही।
 
मूल शब्द ' चूड़ाकरण ' है । चूड़ा सिर पर बालों का एक समूह है सभी बाल हटा दें और गाय के खुर जितना पीछे की सतह पर रखें उन्हें बिना ड्राइंग के सर्कल में रहने दिया जाता है। इन बालों को ' शिखा ' कहा जाता है । भारत में प्राचीन काल से ही सिख धर्म का विशेष महत्व रहा है। शिखा (शेंडी) श्रृंगार है  यह प्रतीक नहीं है, यह बौद्धिक विकास से जुड़ा है। भारत में पूर्व-व्यापार विद्वान बुद्धि को विशेष प्राथमिकता दी जाती है , इसलिए जीवन की शुरुआत से ही बुद्धि के जानबूझकर विकास का प्रयास किया गया था। उस ज्ञान से जो अनुभव से आता है भारतीयों ने समझा कि मानव ज्ञान का केंद्र सिर की सतह है। वहीं से सोच , निर्णय लेने और योजना बनाने का जन्म होता है। तो एड़ी के ऊपर सिर सतह के उस विशेष भाग पर बालों को काटे बिना बनाए रखा जाना चाहिए उसने योजना बनाई। इसके अलावा, भारतीयों का दृढ़ विश्वास था कि एक अंतरिक्ष ऊर्जा का प्रकार है। आकाश से जीवों पर सूक्ष्म रूप से वर्षा हुई रूप लगातार प्रभावित कर रहा है। उस ऊर्जा को अवशोषित करना सीखें (शेंडी) तेल बालों के माध्यम से वाहक के रूप में होता है। इससे माथा ठंडा हो जाता है और शिखर को गर्म रखने की धारणा चलती रही।
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