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- - यदि वह अपने स्वामी को पसन्द न आये, जिसने उसे खरीदा है, तो वह उसे बेच सकता है। उसे किसी विदाशी व्यक्ति को न बेचा जाये, क्यों कि यह उसके साथ विश्वासघात होगा - निर्गमन ग्रंथ २१/७,८  
 
- - यदि वह अपने स्वामी को पसन्द न आये, जिसने उसे खरीदा है, तो वह उसे बेच सकता है। उसे किसी विदाशी व्यक्ति को न बेचा जाये, क्यों कि यह उसके साथ विश्वासघात होगा - निर्गमन ग्रंथ २१/७,८  
 
* न्यायाधिकरण (इन्क्विझिशन) का काम था घोर अत्याचार करना । - - उसने लाखों भाग्यहीन स्त्रियों को जादूगरनिया कहकर आग में झोंक दिया और धर्म के नामपर अनेक प्रकार के लोगों पर कई तरह के अत्याचार किए - बांड रसेल' व्हाय आय ऍम नॉट ए क्रिचियन एड अदर एसेज ऑन रिलीजन' पृष्ठ २४, ७वा संस्करण
 
* न्यायाधिकरण (इन्क्विझिशन) का काम था घोर अत्याचार करना । - - उसने लाखों भाग्यहीन स्त्रियों को जादूगरनिया कहकर आग में झोंक दिया और धर्म के नामपर अनेक प्रकार के लोगों पर कई तरह के अत्याचार किए - बांड रसेल' व्हाय आय ऍम नॉट ए क्रिचियन एड अदर एसेज ऑन रिलीजन' पृष्ठ २४, ७वा संस्करण
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==== ७. विश्वकल्याण ====
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'''विश्व के कल्याण हेतु'''
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* धर्माचार्यों को चाहिये कि वे धर्म को वादविवाद से मुक्त करें, सम्प्रदाय से ऊपर उठायें और धर्म से अविरुद्ध अर्थ और काम के स्वरूप को स्पष्ट करें।
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* विश्वविद्यालयों को चाहिये कि वे ज्ञान की पवित्रता और श्रेष्ठता की रक्षा करें, ज्ञान का संवर्धन करें और दैनन्दिन व्यवहार को ज्ञाननिष्ठ बनाना सिखायें ।
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* शासन को चाहिये कि वह धर्म ज्ञान और सत्य का सम्मान करे, समाज को स्वायत्त बनाये और सर्व व्यवस्थाओं का रक्षण और नियमन करे ।
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* सज्जनों को चाहिये कि वे दुर्जनों से अधिक सामर्थ्य प्राप्त करें और अपनी निष्क्रियता का त्याग कर लोक में सत्य और धर्म की प्रतिष्ठा में सहभागी बने ।
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* धनवानों को चाहिये कि वे समाज के छोटे से छोटे व्यक्ति की आर्थिक स्वतन्त्रता को बाधित न होने दें, सब को स्वाश्रयी, स्वावलम्बी और उद्योग परायण बनना सिखायें।
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* सन्तों को चाहिये कि वे कृतिशील, समर्थ, ज्ञानयुक्त सज्जनता का उपदेश दें।
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* बलवानों को चाहिये कि वे दुर्बलों की रक्षा और आततायी को दण्ड दें, समाज को निर्वीर्य न बनने दें, बल का प्रयोग कर अन्याय न करें ।
    
==References==
 
==References==
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