Changes

Jump to navigation Jump to search
subheading added
Line 35: Line 35:  
२२. प्रत्यक्ष प्लास्टिक और सिन्थेटिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करने पर भी हम ऐसी अनेक बातों में व्यक्तिगत स्तर पर भी सहभागी बनते हैं जो सामाजिकता को हानि पहुँचाती हैं । ऐसी बातों में सहभागी होने से बचना चाहिये ।
 
२२. प्रत्यक्ष प्लास्टिक और सिन्थेटिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करने पर भी हम ऐसी अनेक बातों में व्यक्तिगत स्तर पर भी सहभागी बनते हैं जो सामाजिकता को हानि पहुँचाती हैं । ऐसी बातों में सहभागी होने से बचना चाहिये ।
   −
दृष्टिकोण
+
=== दृष्टिकोण ===
    
२३. हमारी प्रत्यक्ष उपभोग की वस्तुयें स्वदेशी ही हों यह आवश्यक है । प्रथम दृष्टि से तो ये स्वदेशी संस्थानों ट्वारा उत्पादित होनी चाहिये यह समझना सरल है परन्तु आगे चलकर स्वदेशी सिद्धान्तों से उत्पादित हों यह भी आवश्यक है ।
 
२३. हमारी प्रत्यक्ष उपभोग की वस्तुयें स्वदेशी ही हों यह आवश्यक है । प्रथम दृष्टि से तो ये स्वदेशी संस्थानों ट्वारा उत्पादित होनी चाहिये यह समझना सरल है परन्तु आगे चलकर स्वदेशी सिद्धान्तों से उत्पादित हों यह भी आवश्यक है ।
Line 227: Line 227:  
१०६, एक भारतीय हमेशा मोक्ष चाहता है । मोक्ष का अर्थ है मुक्ति । हम किन किन बातों से मुक्ति चाहते हैं इसकी ही प्रथम तो स्पष्टता कर लेनी चाहिये । वह चाह कितनी स्थिर है यह भी देखना चाहिये । यह चाह कितनी उचित है इसका भी विवेक होना चाहिये । इसके बाद मुक्ति की चाह पूर्ण कैसे होगी उसका विचार होगा और उसे प्राप्त करने हेतु प्रयास भी होगा ।
 
१०६, एक भारतीय हमेशा मोक्ष चाहता है । मोक्ष का अर्थ है मुक्ति । हम किन किन बातों से मुक्ति चाहते हैं इसकी ही प्रथम तो स्पष्टता कर लेनी चाहिये । वह चाह कितनी स्थिर है यह भी देखना चाहिये । यह चाह कितनी उचित है इसका भी विवेक होना चाहिये । इसके बाद मुक्ति की चाह पूर्ण कैसे होगी उसका विचार होगा और उसे प्राप्त करने हेतु प्रयास भी होगा ।
   −
कौशलविकास
+
=== कौशलविकास ===
    
१०७. समझदार लोग कहते हैं कि समाज में सक्रिय दुर्जनों के कारण जितने संकट पैदा होते हैं उसकी अपेक्षा निष्क्रिय सज्जनों से अधिक होते हैं । इसलिये सज्जन होने के साथ साथ सक्रिय भी होना चाहिये और सामर्थ्यवान भी ।
 
१०७. समझदार लोग कहते हैं कि समाज में सक्रिय दुर्जनों के कारण जितने संकट पैदा होते हैं उसकी अपेक्षा निष्क्रिय सज्जनों से अधिक होते हैं । इसलिये सज्जन होने के साथ साथ सक्रिय भी होना चाहिये और सामर्थ्यवान भी ।
216

edits

Navigation menu