Changes

Jump to navigation Jump to search
m
Text replacement - "नजदीक" to "समीप"
Line 7: Line 7:  
उस निवास को देखने की महाराज की उत्सुकता बढ़ाने लगी ।  
 
उस निवास को देखने की महाराज की उत्सुकता बढ़ाने लगी ।  
   −
सभी उस निवास स्थान की ओर चल पड़े, चलते चलते नगर के बाहर आ गये थे। महाराज ने तेनालीरामा से पूछा "अभी कितनी दूर है नगर भी समाप्त होने वाला है।" तेनालीरामा ने कहा "बस हम आ गए, सामने कुटिया दिख रही है।" महाराज को कुटिया दिखी परन्तु कोई सजावट नहीं थी, महाराज को आश्चर्य हुआ कि तेनालीरामा हमें कहाँ ले आए । कुटिया पहुचकर सभी जब अन्दर प्रवेश करते है तो देखते है कि एक आचार्य है जो सभी विद्यार्थियों को ज्ञान दे रहे थे। महाराज को देखकर आचार्य खड़े हो गयें । तेनालीरामा ने महाराज को इशारे में आचार्य के नजदीक रखे दिये की ओर संकेत किया । महाराज समझ ना सके । तब तेनालीरामा ने कहा महाराज देखिये यहाँ ज्ञान का दीपक जल रहा है जिससे हजारो विद्यार्थी प्रकाशवान हो रहे है । इस एक ज्ञान के दीपक से कितनो के घरो में उजाले होंगे ।  
+
सभी उस निवास स्थान की ओर चल पड़े, चलते चलते नगर के बाहर आ गये थे। महाराज ने तेनालीरामा से पूछा "अभी कितनी दूर है नगर भी समाप्त होने वाला है।" तेनालीरामा ने कहा "बस हम आ गए, सामने कुटिया दिख रही है।" महाराज को कुटिया दिखी परन्तु कोई सजावट नहीं थी, महाराज को आश्चर्य हुआ कि तेनालीरामा हमें कहाँ ले आए । कुटिया पहुचकर सभी जब अन्दर प्रवेश करते है तो देखते है कि एक आचार्य है जो सभी विद्यार्थियों को ज्ञान दे रहे थे। महाराज को देखकर आचार्य खड़े हो गयें । तेनालीरामा ने महाराज को इशारे में आचार्य के समीप रखे दिये की ओर संकेत किया । महाराज समझ ना सके । तब तेनालीरामा ने कहा महाराज देखिये यहाँ ज्ञान का दीपक जल रहा है जिससे हजारो विद्यार्थी प्रकाशवान हो रहे है । इस एक ज्ञान के दीपक से कितनो के घरो में उजाले होंगे ।  
    
महाराज समझ गये की श्रृष्टि में सबसे अधिक प्रकाशवान और स्वच्छ ज्ञान होता है इससे अधिक मूल्यवान कोई वस्तु नहीं होती है। महाराज ने इनाम की राशि आश्रम को देने का निर्णय लिया और तेनालीरामा द्वारा ज्ञान के विषय को समझाने की कला की बहुत प्रशंसा की और उन्हें दीपावली का उपहार भी दिया।
 
महाराज समझ गये की श्रृष्टि में सबसे अधिक प्रकाशवान और स्वच्छ ज्ञान होता है इससे अधिक मूल्यवान कोई वस्तु नहीं होती है। महाराज ने इनाम की राशि आश्रम को देने का निर्णय लिया और तेनालीरामा द्वारा ज्ञान के विषय को समझाने की कला की बहुत प्रशंसा की और उन्हें दीपावली का उपहार भी दिया।
    
[[Category:बाल कथाए एवं प्रेरक प्रसंग]]
 
[[Category:बाल कथाए एवं प्रेरक प्रसंग]]

Navigation menu