Line 271: |
Line 271: |
| | | |
| | | |
− | हिरण्यगर्भमासीनं तस्मिंस्तु परमासने॥ 1-1-65 | + | हिरण्यगर्भमासीनं तस्मिंस्तु परमासने॥ 1-1-65 |
− | परिवृत्यासनाभ्याशे वासवेयः स्थितोऽभवत्। | + | परिवृत्यासनाभ्याशे वासवेयः स्थितोऽभवत्। |
− | अनुज्ञातोऽथ कृष्णस्तु ब्रह्मणा परमेष्ठिना॥ 1-1-66 | + | अनुज्ञातोऽथ कृष्णस्तु ब्रह्मणा परमेष्ठिना॥ 1-1-66 |
− | निषसादासनाभ्याशे प्रीयमाणः सुवि[शुचि]स्मितः। | + | निषसादासनाभ्याशे प्रीयमाणः सुवि[शुचि]स्मितः। |
− | उवाच स महातेजा ब्रह्माणं परमेष्ठिनम्॥ 1-1-67 | + | उवाच स महातेजा ब्रह्माणं परमेष्ठिनम्॥ 1-1-67 |
− | कृतं मयेदं भगवन्काव्यं परमपूजितम्। | + | कृतं मयेदं भगवन्काव्यं परमपूजितम्। |
− | ब्रह्मन्वेदरहस्यं च यच्चाप्यभिहितं[यच्चान्यत्स्थापितं] मया॥ 1-1-68 | + | ब्रह्मन्वेदरहस्यं च यच्चाप्यभिहितं[यच्चान्यत्स्थापितं] मया॥ 1-1-68 |
− | साङ्गोपनिषदां चैव वेदानां विस्तरक्रिया। | + | साङ्गोपनिषदां चैव वेदानां विस्तरक्रिया। |
− | इतिहासपुराणानामुन्मेषं निर्मितं च यत्॥ 1-1-69 | + | इतिहासपुराणानामुन्मेषं निर्मितं च यत्॥ 1-1-69 |
− | भूतं भव्यं भविष्यं च त्रिविधं कालसंज्ञितम्। | + | भूतं भव्यं भविष्यं च त्रिविधं कालसंज्ञितम्। |
− | जरामृत्युभयव्याधिभावाभावविनिश्चयः॥ 1-1-70 | + | जरामृत्युभयव्याधिभावाभावविनिश्चयः॥ 1-1-70 |
− | विविधस्य च धर्मस्य ह्याश्रमाणां च लक्षणम्। | + | विविधस्य च धर्मस्य ह्याश्रमाणां च लक्षणम्। |
− | चातुर्वर्ण्यविधानं च पुराणानां च कृत्स्नशः॥ 1-1-71 | + | चातुर्वर्ण्यविधानं च पुराणानां च कृत्स्नशः॥ 1-1-71 |
− | तपसो ब्रह्मचर्यस्य पृथिव्याश्चन्द्रसूर्ययोः। | + | तपसो ब्रह्मचर्यस्य पृथिव्याश्चन्द्रसूर्ययोः। |
− | ग्रहनक्षत्रताराणां प्रमाणं च युगैः सह॥ 1-1-72 | + | ग्रहनक्षत्रताराणां प्रमाणं च युगैः सह॥ 1-1-72 |
− | ऋचो यजूंषि सामानि वेदाध्यात्मं तथैव च। | + | ऋचो यजूंषि सामानि वेदाध्यात्मं तथैव च। |
− | न्यायशिक्षाचिकित्सा च ज्ञा[दा]नं पाशुपतं तथा॥ 1-1-73 | + | न्यायशिक्षाचिकित्सा च ज्ञा[दा]नं पाशुपतं तथा॥ 1-1-73 |
− | इत्यनेकाश्रयं[हेतुनैव समं] जन्म दिव्यमानुषसंश्रि[ज्ञि]तम्। | + | इत्यनेकाश्रयं[हेतुनैव समं] जन्म दिव्यमानुषसंश्रि[ज्ञि]तम्। |
− | तीर्थानां चैव पुण्यानां देशानां चैव कीर्तनम्॥ 1-1-74 | + | तीर्थानां चैव पुण्यानां देशानां चैव कीर्तनम्॥ 1-1-74 |
− | नदीनां पर्वतानां च वनानां सागरस्य च। | + | नदीनां पर्वतानां च वनानां सागरस्य च। |
− | पुराणां चैव दिव्यानां कल्पानां युद्धकौशलम्॥ 1-1-75 | + | पुराणां चैव दिव्यानां कल्पानां युद्धकौशलम्॥ 1-1-75 |
− | वाक्यजातिविशेषाश्च लोकयात्राक्रमश्च यः। | + | वाक्यजातिविशेषाश्च लोकयात्राक्रमश्च यः। |
− | यच्चापि सर्वगं वस्तु तच्चैव प्रतिपादितम्॥ 1-1-76 | + | यच्चापि सर्वगं वस्तु तच्चैव प्रतिपादितम्॥ 1-1-76 |
− | परं न लेखकः कश्चिदेतस्य भुवि विद्यते। | + | परं न लेखकः कश्चिदेतस्य भुवि विद्यते। |
| [[:Category:Mahabharata|''Mahabharata'']] [[:Category:Contents|''Contents'']] [[:Category:Mahabharata contents|''Mahabharata contents'']] | | [[:Category:Mahabharata|''Mahabharata'']] [[:Category:Contents|''Contents'']] [[:Category:Mahabharata contents|''Mahabharata contents'']] |
| [[:Category:महाभारत|''महाभारत'']] [[:Category:विषयों|''विषयों'']] [[:Category:महाभारतके विषयों|''महाभारत विषयों'']] | | [[:Category:महाभारत|''महाभारत'']] [[:Category:विषयों|''विषयों'']] [[:Category:महाभारतके विषयों|''महाभारत विषयों'']] |