कौटिल्य के अनुसार राजकीय कोष का प्रधान अधिकारी सन्निधाता कहलाता था। सन्निधाता का दायित्व था कि वह कोषगृह, पण्यगृह, कोष्ठागार, कुष्ठागार, आयुधागार तथा कारागार आदि की स्थापना कर उनकी समुचित देखरेख करे। कोषगृह आदि की संपूर्ण व्यवस्था उसके अधीन संचालित होती थी तथा कोषाध्यक्ष, पण्याध्यक्ष आदि अन्य अधिकारी उसके निर्देशन में अपने-अपने कार्यों का निर्वहन करते थे। | कौटिल्य के अनुसार राजकीय कोष का प्रधान अधिकारी सन्निधाता कहलाता था। सन्निधाता का दायित्व था कि वह कोषगृह, पण्यगृह, कोष्ठागार, कुष्ठागार, आयुधागार तथा कारागार आदि की स्थापना कर उनकी समुचित देखरेख करे। कोषगृह आदि की संपूर्ण व्यवस्था उसके अधीन संचालित होती थी तथा कोषाध्यक्ष, पण्याध्यक्ष आदि अन्य अधिकारी उसके निर्देशन में अपने-अपने कार्यों का निर्वहन करते थे। |