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९. न्यायालय के कटघरे में एक व्यक्ति आरोपी के पिंजडे में खडा है। सब जानते हैं कि वह दोषी है । दोनों पक्षों के वकील, दोनों पक्षों के साक्षीदार, न्यायालय में उपस्थित सभी दर्शक, स्वयं न्यायाधीश जानते हैं कि वह दोषी है। परन्तु प्रमाणों के अभाव में वह निर्दोष सिद्ध होता है। उसे निर्दोष बताने वाले भी जानते ही हैं कि वह दोषी है। इसके बावजूद वह निर्दोष सिद्ध होता है । किसका दायित्व है ?
 
९. न्यायालय के कटघरे में एक व्यक्ति आरोपी के पिंजडे में खडा है। सब जानते हैं कि वह दोषी है । दोनों पक्षों के वकील, दोनों पक्षों के साक्षीदार, न्यायालय में उपस्थित सभी दर्शक, स्वयं न्यायाधीश जानते हैं कि वह दोषी है। परन्तु प्रमाणों के अभाव में वह निर्दोष सिद्ध होता है। उसे निर्दोष बताने वाले भी जानते ही हैं कि वह दोषी है। इसके बावजूद वह निर्दोष सिद्ध होता है । किसका दायित्व है ?
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१०. विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों के जो पाठ्यक्रम होते हैं उनके विषय में दो प्रकार की शिकायतें होती हैं। एक यह कि वे व्यावहारिक जीवन के साथ सुसंगत नहीं होते हैं। दूसरी यह कि वे भारतीय जीवनदृष्टि के साथ भी सुसंगत नहीं होते । पाठ्यक्रम निर्मिति का काम विश्वविद्यालयों का ही होता है । फिर वे क्यों नहीं करते ? यदि वे नहीं करते तो कौन क्या कर सकता है ?
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१०. विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों के जो पाठ्यक्रम होते हैं उनके विषय में दो प्रकार की शिकायतें होती हैं। एक यह कि वे व्यावहारिक जीवन के साथ सुसंगत नहीं होते हैं। दूसरी यह कि वे धार्मिक जीवनदृष्टि के साथ भी सुसंगत नहीं होते । पाठ्यक्रम निर्मिति का काम विश्वविद्यालयों का ही होता है । फिर वे क्यों नहीं करते ? यदि वे नहीं करते तो कौन क्या कर सकता है ?
    
११. सडक पर दुर्घटना होती है । कोई एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल होता है । आसपास से अनेक वाहन गुजर रहे हैं । कोई भी व्यक्ति उस घायल व्यक्ति को अस्पताल में नहीं पहुँचाता । वह व्यक्ति मर जाता है । समय से अस्पताल पहुँचाया जाता तो कदाचित नहीं मरता । ऐसी स्थिति में कौन क्या कर सकता है?
 
११. सडक पर दुर्घटना होती है । कोई एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल होता है । आसपास से अनेक वाहन गुजर रहे हैं । कोई भी व्यक्ति उस घायल व्यक्ति को अस्पताल में नहीं पहुँचाता । वह व्यक्ति मर जाता है । समय से अस्पताल पहुँचाया जाता तो कदाचित नहीं मरता । ऐसी स्थिति में कौन क्या कर सकता है?

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