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१२७
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कृत्रिम वस्तुओं से छुटकारा पाने के लिये हम
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क्या कर सकते हैं ?
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६. विद्यालय में ए.सी., कूलर, फ्रीज, पंखे, वाहन
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आदि के सम्बन्ध में कैसे सोचना चाहिये ?
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प्रश्नावली से प्राप्त उत्तर
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विद्यालय में पर्यावरण सुरक्षा के बारे में वैचारिक
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स्पष्टटा और उस सन्दर्भ में उसे व्यवहार में कैसे लागू कर
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सकते हैं ? यह जानना इस प्रश्नावली का प्रयोजन था ।
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आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में सहभागी आचार्यों की इसमें
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सहभागिता रही ।
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प्रश्नावली के प्रथम तीन प्रश्न वैचारिक स्पष्टता हेतु थे ।
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पर्यावरण के सम्बन्ध में स्पष्टता कम और सुरक्षा की समझ
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पर्याप्त है, ऐसे उत्तर मिले । जैसे कि प्राकृतिक विपत्तियों के
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निवारण हेतु, मानवजीवन को सुरक्षित रखने हेतु, ग्लोबल
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वार्मिंग रूपी वैश्विक समस्या का उपाय आदि । पृथ्वी, जल,
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तेज, वायु व आकाश ये पंचमहाभूत पर्यावरण के घटक हैं ।
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एक मात्र यह सही उत्तर श्री अन्नपूर्णा बहन का था । अन्यों
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भारतीय शिक्षा के व्यावहारिक आयाम
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को तो घटक शब्द का अर्थ ही समझ में... में ही किया जाता है । जब से यन्त्र आधारित कारखाने शुरू
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नहीं आया । हुए और रसायनों का बहुलता से प्रयोग शुरु हुआ तबसे
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प्रश्न ४ में दी हुई अनेक बातों में अपनी व्यक्तिगत... पर्यावरण के प्रदूषण की समस्या शुरू हुई । तबसे विद्यालयों
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टिप्पणी लिखें यह अपेक्षा थीं । इसके उत्तर में यज्ञ करना... में पर्यावरण का विषय अध्ययन के क्रम में प्रविष्ट हुआ ।
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चाहिए, कीटें से रक्षा के उपाय प्राकृतिक हों, रासायनिक नहीं,
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ऐसे उत्तर मिले । प्राकृतिक साधनों का उपयोग करना और
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कृत्रिम साधनों को त्यागना, इस प्रश्न का भी समाधान कारक
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उत्तर नहीं मिला । हाँ, विद्यालय में कूलर, फ्रीज, ऐ.सी. आदि
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उपकरणों का विरोध अवश्य किया ।
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अभिमत : पंचमहाभूतों से यह सृष्टि बनी हैं । प्रत्येक
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महाभूत सृष्टि का सन्तुलन एवं स्वच्छता बनाये रखने का
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कार्य करता है । अतः इनकी सुरक्षा करना सही अर्थ में
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पर्यावरण की सुरक्षा है । परन्तु मनुष्य अपनी इच्छाओं की
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पूर्ति हेतु अपनी विकृत बुद्धि से उनका नाश कर रहा है , उन्हें
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प्रदूषित कर रहा है ।
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विद्यालय भवन निर्माण में लकड़ी, बाँस, मिट्टी, चूना
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आदि प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करना चाहिए । प्लास्टिक,
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लोहा आदि से निर्मित उपस्कर काममें नहीं लेने चाहिए । आज
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के छात्रों के पास, कम्पास, पैन, स्केल, कवर पेपर, बेग आदि
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सभी वस्तुएँ प्लास्टिक की होती है, इन्हें वर्जित करना ।
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प्राथमिक कक्षाओं में अनिवार्य रूप से पत्थर की स्लेट का
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उपयोग करना । विद्यालय प्रांगण में वृक्ष लगाना । दैनन्दिन
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अगिहोत्र करने से पर्यावरण की शुद्धि होगी । स्वच्छता हेतु भी पर्यावरण सम्बन्धित व्यावहारिक विचार
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पर्यावरण विचार के कुछ मुद्दे
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प्रदूषण का विषय आता है तब तीन बातों का उल्लेख
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होता है, हवा, पानी और भूमि का प्रदूषण ।
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प्रदूषण की समस्या का विचार करते समय मूल बातों से
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प्रारम्भ करना आवश्यक है । पर्यावरण की भारतीय संकल्पना
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क्या है इसका भी विचार करना चाहिये । उसके सन्दर्भ में ही
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प्रदूषण की समस्या और उसके निराकरण का और उसके सन्दर्भ
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में ही विद्यालय में पर्यावरण विचार करना चाहिये ।
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कुछ मुद्दे इस प्रकार हैं
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१... भारतीय संकल्पना के अनुसार पर्यावरण के आठ अंग
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हैं । ये हैं मन, बुद्धि, अहंकार, आकाश, वायु, अग्ि,
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जल और पृथ्वी । इन सबका प्रदूषण होता है ।
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२... यह प्रदूषण केवल शरीर पर असर करके नहीं रुकता है,
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वह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर करता है और बुद्धि
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को विकृत बनाता है ।
३... अतः केवल भौतिक नहीं अपितु सांस्कृतिक प्रदूषण के
३... अतः केवल भौतिक नहीं अपितु सांस्कृतिक प्रदूषण के