Parashuram (परशुराम)

From Dharmawiki
Jump to: navigation, search
StubArticle.png
This is a short stub article. Needs Expansion.
NeedCitation.png
This article needs appropriate citations and references.

Improvise this article by introducing references to reliable sources.

भृगु कुल में उत्पन्न व्यक्तियों में जमदग्नि ऋषि और रेणुका देवी के पुत्र परशुराम का नाम सर्वप्रमुख है। इनकी गणना भगवान विष्णु के दश अवतारों में हुई है। ये छठे अवतार थे। इन्होंने कश्यप ऋषि से मंत्र-विद्या और भगवान शिव से धनुर्वेद प्राप्त किया था। ये महापराक्रमी हुए हैं। इनकी माता सूर्यवंश की राजकुमारी और इनकी पितामही (जमदग्नि की माता) कान्यकुब्ज के चंद्रवंश की राजकुमारी तथा विश्वामित्र की बड़ी बहन थीं। इस प्रकार इनका निकट संबंध अपने समय के दोनों प्रसिद्ध क्षत्रिय राजवंशों से था। जब कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन ने इनकी अनुपस्थिति में इनके तपस्यारत पिता जमदग्नि का वध कर दिया तो इन्होंने क्रोधावेश में सहस्त्रार्जुन सहित विश्वभर के सारे अत्याचारी राजाओं और उनके जन-उत्पीड़नकारी सहायकों का संहार किया | तथा समस्त पृथ्वी जीतकर अपने मंत्रविद्या-गुरु कश्यप ऋषि को दान में दे दी और स्वयं पश्चिम-सागर के तट पर समुद्र में से नयी भूमि का निर्माण कर वहाँ तप करने लगे। इन्होंने कामरूप (आसम) में भी तपस्या की और पर्वतों से घिरकर विशाल सागर सा बनाये ब्रह्मपुत्र महानद को, अपने परशु से पर्वत काटकर, भारत की ओर बहने का मार्ग दिया। उस तपःस्थान पर आज भी परशुरामकुंड प्रसिद्ध है। महाभारत के तीन दुर्धर्ष महावीर - भीष्म, द्रोण और कर्ण - इनके शिष्य और चौथे अर्जुन इनके शिष्य के शिष्य थे। शिव के परम भक्त परशुराम तेजस्विता, अत्याचार के प्रचंड प्रतिशोध एवं अनीतिविरोधी विकट प्रतिकार के प्रतीक हैं।