Education on Bharatiya and Hindu

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Contents

साध्य । Aim

मर्म बिन्दु । Salient features

शिक्षण व्यवस्था ।

धार्मिकता के इस्लाम के, इसाईयत के, कम्युनिझम के अन्तरंग अध्ययन/अध्यापन की व्यवस्था करना |

रक्षण व्यवस्था ।

धार्मिकता की रक्षा की दृष्टी से धर्मान्तर/घरवापसी के क़ानून निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था आदि की आश्वस्ति के प्रयास करना |

पोषण व्यवस्था ।

अधार्मिक, भारतद्रोही व्यक्तियों/संगठनों का बहिष्कार और पूरक पोषक गतिविधियों को सहायता |

अपनी भूमिका ।

  • अपनी आयु को ध्यान में रखते हुए अपनी अपनी भूमिका तय करना और करणीय कार्य करना |
  • जिन के करने की सामर्थ्य न हो उन्हें करने का दुस्साहस कर विरोध को आमंत्रित नहीं करना |
आयु की अवस्था | करणीय कार्य |

गर्भपूर्व अवस्था ॥ Before Conception

  1. श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गए वर्णधर्म याने ‘स्वधर्म’ को समझना |  
  2. अपने [[Varna System ([[Varna_System_(वर्ण_व्यवस्था)|वर्ण व्यवस्था]])|वर्ण]] के अनुसार ज्ञानार्जन करना | आदतें बनाना |  
  3. यम नियमों का अनुपालन करना |
  4. एकात्मता स्तोत्र का कंठस्थीकरण करना |
  5. सांस्कृतिक भारत के मानचित्र का वर्तमान मानचित्र के सन्दर्भ में अध्ययन करना |
  6. भारत के भूगोल के इतिहास को समझना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. अध्यापक बनने के लिए आवश्यक बातें करना ।
  2. नियमित स्वाध्याय करना ।
  3. स्वाध्याय से अर्जित ज्ञान को समझना ।
  4. व्यावहारिक युगानुकुल पद्धति से समाज के घटकों को समझाने के प्रयास करना |

रक्षण कार्य ।

रक्षण के लिए आवश्यक बातें करना |

  1. व्यक्तिगत स्वास्थ्य, बल, युद्ध कौशल में वृद्धि के प्रयास करना ।
  2. संगठन बनाना या संगठन से जुड़ना |

पोषण कार्य ।

  1. अध्यापकों और रक्षकों को धन साधन और संसाधनों की (पोषण) कमी न रहे, इस हेतु प्रयास करना |
  2. रक्षक संगठनों से जुड़ना |

गर्भावस्था ॥ During Pregnancy

  • यहाँ मुख्य भूमिका माता की होगी | पिता सहायक होगा |
  • गर्भपूर्व के करणीय कार्यों में से जो भी संभव हैं उन्हें वैद्य की अनुमति से करना |
  • अष्टांग योग के यम, नियमों की नींव यहीं से डाली जाती है | यम, नियम आत्मसात करना सभी वर्णों के लिए अनिवार्य है |
  • एकात्मता स्तोत्र का कंठस्थीकरण करना |
  • सांस्कृतिक भारत के मानचित्र का वर्तमान मानचित्र के सन्दर्भ में अध्ययन करना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. धार्मिक शास्त्रीय साहित्य पढ़ना | मनन चिंतन करना | विविध आयु के लोगोंं से विषय की चर्चा करना | जो समझने के लिए उत्सुक हैं ऐसे लोगोंं को ढूँढना और उनका मार्गदर्शन करना |
  2. इस दृष्टी से बच्चोंं के लिए कथाओं का उपयोग करना | जैसे युधिष्ठिर की कथा |

रक्षण कार्य ।

  1. सम्राटों की, धर्मरक्षकों की कथाएँँ पढ़ना/पढ़ाना |
  2. शारीरिक बल, स्वास्थ्य, युद्ध कौशल आदि की गर्भ की अवस्था को ध्यान में रखकर (वैद्य के मार्गदर्शन में) वृद्धि के प्रयास करना |
  3. धर्म रक्षकों का सत्संग करना |

पोषण कार्य ।

  1. धर्म रक्षकों का सत्संग करना |
  2. धन-दान देना | समय देना | सुविधाएं देना |
  3. रघुराजा की, हर्षवर्धन की कथाएँँ पढ़ना/पढ़ाना |

शिशु अवस्था ॥ Childhood (Until the age of 5years)

  • यहाँ भी मुख्य भूमिका माता की रहेगी | पिता तथा कुटुंब के अन्य सदस्यों की भूमिका सहायक की होगी |
  • यम. नियमों का अनुपालन करवाना |
  • बच्चे को सांस्कृतिक भारत का मानचित्र दिखाना |
  • एकात्मता स्तोत्र का कंठस्थीकरण करवाना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. वेदव्यास, याज्ञवल्क्य, मध्वाचार्य विद्यारण्य, तुकाराम, रामदास, गुरु गोविन्दसिंह आदि की प्रतिमाएँ बताना, नमन करवाना, उन की कहानियाँ कहना | वेश पहनाना |
  2. धार्मिक वैज्ञानिकों की प्रतिमाएँ बताना, नमन करवाना, उन की कहानियाँ कहना | वेश पहनाना | उन के जैसा बनने की प्रेरणा देना |
  3. भारत, हिन्दुस्थान की व्याख्याएँ कंठस्थ करवाना |
  4. सांस्कृतिक भारत का मानचित्र बताना/बनवाना |

रक्षण कार्य ।

  1. सम्राटों की, रामायण, महाभारत की शौर्य कथाएँँ सुनाना
  2. रघुराजा, हर्षवर्धन, बाप्पा रावल, शिवाजी, रणजीतसिंह आदि की कहानियाँ सुनाना |
  3. बच्चे को बलार्जन की प्रेरणा देना |
  4. हनुमान, भीम आदि की कहानियाँ सुनाना |

पोषण कार्य ।

  1. रघुराजा, हर्षवर्धन, तुकाराम, भामाशाह, दामाजी आदि की कहानियाँ सुनाना |  

बाल अवस्था ॥ Childhood (From the age between 6 to 10 years)

  • यहाँ से आगे पिता, गुरू(मानसपिता) की भूमिका मुख्य होती है | माता तथा कुटुंब के अन्य सदस्यों की भूमिका सहायक की होगी |
  • यही आयु अच्छी आदतों की प्रतिष्ठापना के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है | यहाँ ताडन का उपयोग भी आवश्यकतानुसार स्वीकृत है |
  • रोज एकात्मता स्तोत्र पाठन करवाना |
  • संभाजी, बन्दा बैरागी, बाल हकीकत, सिख गुरुपुत्रों जैसी कथाएँँ सुनाना |
  • अनसूया, लोपामुद्रा, गार्गी, मैत्रेयी, कुंती, द्रौपदी, सत्यभामा, सीता, सावित्री, भारती, रानी रुद्रमाम्बा, रानी चन्नम्मा, ताराबाई आदि पुण्यप्रतापी स्त्रियों की, क्रांतिकारियों की, वेदव्यास, याज्ञवल्क्य, मध्वाचार्य विद्यारण्य, तुकाराम, रामदास, गुरु गोविन्दसिंह आदि की कथाओं का वाचन करवाना | कथन करवाना |
  • कणाद, कपिल, वराहमिहीर, भास्कराचार्य, नागार्जुन आदि धार्मिक वैज्ञानिकों की, रामायण, महाभारत की कथाओं का वाचन करवाना | कथन करवाना |
  • भारत के गौरवमय अतीत की, विश्वगुरुत्व की जानकारी देना |

शैक्षणिक कार्य ।

  • उपर्युक्त में श्रेष्ठ विप्र, श्रेष्ठ क्षत्रिय और श्रेष्ठ वैश्य कैसे होते हैं, इसे स्पष्ट करना | शैक्षणिक कार्य में योगदान देने के हेतु श्रेष्ठ विप्र बनने की प्रेरणा देना |

रक्षण कार्य ।

  • उपर्युक्त में श्रेष्ठ विप्र, श्रेष्ठ क्षत्रिय और श्रेष्ठ वैश्य कैसे होते हैं, इसे स्पष्ट करना | रक्षण कार्य में योगदान देने के हेतु श्रेष्ठ क्षत्रिय बनने की प्रेरणा देना |

पोषण कार्य ।

  • उपर्युक्त में श्रेष्ठ विप्र, श्रेष्ठ क्षत्रिय और श्रेष्ठ वैश्य कैसे होते हैं, इसे स्पष्ट करना | पोषण कार्य में योगदान देने के हेतु श्रेष्ठ वैश्य बनने की प्रेरणा देना |  

किशोर अवस्था ॥ Adolescence (Age between 11 and 15 years)

  • इस आयु में भी पिता, गुरु (मानसपिता) की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है | माता और घर के अन्य सदस्यों की भूमिका सहायक की होगी |
  • इस आयु में बुद्धि का उपयोग आरम्भ हो जाता है | अतः ‘धार्मिक’ की बुद्धियुक्त पहचान कराना | वर्णानुसार कर्म/व्यवहार का महत्त्व समझाना |
  • श्रीमद्भगवद्गीता, एकात्म मानव दर्शन, सत्यार्थ प्रकाश जैसे पुस्तकों का अध्ययन, मनन, चिंतन करने की प्रेरणा देना |
  • सांस्कृतिक भारत के मानचित्र का वर्तमान मानचित्र के सन्दर्भ में अध्ययन करना |
  • बलोपार्जन करना | नियुद्ध, दण्डयुद्ध सीखना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. भारत के भूगोल के इतिहास को समझना | इस में विप्र की भूमिका का विचार करना | इस में विप्र होने के नाते शैक्षणिक क्षेत्र में मेरी क्या भूमिका होगी ? यह विचार आरम्भ हो |
  2. समविचारी विप्र वृत्ति के मित्र जोड़ना | ऐसा विचार करनेवाले संगठन से जुड़ना |

रक्षण कार्य ।

  1. भारत के भूगोल के इतिहास को समझना | इस में क्षत्रिय होने के नाते रक्षण क्षेत्र में मेरी क्या भूमिका होगी ? यह विचार आरम्भ हो |
  2. क्षत्रिय वृत्ति के समविचारी मित्र जोड़ना | ऐसा विचार करनेवाले संगठन से जुड़ना |

पोषण कार्य ।

  1. भारत के भूगोल के इतिहास को समझना | इस में वैश्य होने के नाते पोषण क्षेत्र में मेरी क्या भूमिका होगी ? यह विचार आरम्भ हो |
  2. समविचारी वैश्य वृत्ति के मित्र जोड़ना | ऐसा विचार करनेवाले संगठन से जुड़ना |

युवा अवस्था ॥ Youth (Age between 16 and 25 years)

  • इस आयु में अब युवक स्वतन्त्र रूप में भी कई बातें करने की स्थिति में होता है |
  • अपना व्यवहार वर्णानुसारी रखना |
  • लोकसंग्रह करना |
  • श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करना | कुर्रान, हदीस, ओल्ड टेस्टामेंट, न्यू टेस्टामेंट (बायबल) का अध्ययन करना |
  • धार्मिकता, इस्लाम और इसाईयत को समझना | लोगोंं को समझाना |
  • इनकी श्रीमद्भगवद्गीता से भिन्नता ही इनकी विशेषता है, इसे समझना | इनकी विशेषता का योजनाबद्ध प्रचार प्रसार करना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. नियुद्ध, दंड संचालन आदि में प्रवीणता प्राप्त करना |

रक्षण कार्य ।

  1. नियुद्ध, दंड संचालन आदि में प्रवीणता प्राप्त करना |
  2. गोरक्षक दल, बजरंग दल आदि गतिविधियों से जुड़ना | सेना, पुलिस, गुप्तचर विभाग में सेवाएँ देना | विपरीत विचार के लोगोंं/संगठनों में सेंध लगाना |

पोषण कार्य ।

  1. नियुद्ध, दंड संचालन आदि में प्रवीणता प्राप्त करना | गोरक्षक/बजरंग दल आदि गतिविधियों से जुड़ना |

गृहस्थ अवस्था ॥ Householder's phase (Age between 26 to 60)

  • सम्पूर्ण समाजकाही नहीं तो चराचर का हित देखने की जिम्मेदारी गृहस्थ की होती है |
  • इस दृष्टी से गर्भपूर्व से लेकर वृद्धावस्थातक के लोगोंं के सभी कर्तव्यों का अनुपालन हो ऐसी व्यवस्थाएँ और वातावरण बनाना/चलाना, लोकसंग्रह करना आदि जैसी बहुत व्यापक जिम्मेदारियाँ हैं |
  • गहराई से श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करना | कुर्रान, हदीस, ओल्ड टेस्टामेंट, न्यू टेस्टामेंट (बायबल) का अध्ययन करना |

शैक्षणिक कार्य ।

  1. धार्मिकता, इस्लाम और इसाईयत को समझना | लोगोंं को समझाना |
  2. इनकी श्रीमद्भगवद्गीता से भिन्नता ही इनकी विशेषता है, इसे समझाना | इनकी विशेषता का व्याख्यानों, लेखों से प्रचार प्रसार करना | साहित्य निर्माण करना |
  3. नियुद्ध, दंड संचालन आदि के प्राविण्य वर्ग चलाना | आवश्यकतानुसार कानूनी सहायता की उपलब्धता की आश्वस्ति |

रक्षण कार्य ।

  1. धार्मिकता, इस्लाम और इसाईयत को समझना | लोगोंं को समझाना |
  2. श्रीमद्भगवद्गीता से इनकी भिन्नता ही इनकी विशेषता है, इसे समझाना | इनकी विशेषता का व्याख्यानों, लेखों से प्रचार प्रसार करना | साहित्य निर्माण में योगदान देना |
  3. नियुद्ध, दंड संचालन आदि के नैपुण्य वर्ग चलाना | संरक्षक दल निर्माण कर सुरक्षा की नित्यसिद्ध योजना बनाना |

पोषण कार्य ।

  1. धार्मिकता, इस्लाम और इसाईयत को समझना |
  2. इनकी श्रीमद्भगवद्गीता से भिन्नता ही इनकी विशेषता है, इसे समझाना | इस विषय के व्याख्यान, नैपुण्य वर्ग, लेखों का प्रकाशन, मुकदमे आदि का आर्थिक भार उठाना |

प्रौढ और वृद्ध अवस्था ॥ Old age

  1. युवा लोग उत्साह में भरकर साहस तो करें लेकिन दुस्साहस न करें इस दृष्टी से युवाओं को मार्गदर्शन करना |
  2. पार्श्व के काम सम्भालना |
  3. सामाजिक संरक्षक की भूमिका निभाना | अपनी भूमिका सलाहकार तक ही सीमित रखना |
  4. आवश्यकतानुसार अपने अनुभवों से युवा वर्ग लाभान्वित होवे ऐसा प्रयास करना |
  5. अपने अपने वर्ण के युवा और गृहस्थी लोगोंं को समर्थन, सहायता और मार्गदर्शन करना |

शैक्षणिक कार्य ।

रक्षण कार्य ।

पोषण कार्य ।