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# ऐसी कौन सी बातें हैं जो इन सभी को समान रूप से लागू होनी चाहिये ?  
 
# ऐसी कौन सी बातें हैं जो इन सभी को समान रूप से लागू होनी चाहिये ?  
 
# इन सभी में विद्यालय किस दृष्टि से किसका होता है?
 
# इन सभी में विद्यालय किस दृष्टि से किसका होता है?
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पर्व ३ : विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्थाएँ
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==== प्रश्नावली से पाप्त उत्तर ====
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इस वैचारिक स्वरूप की प्रश्नावली पर गुजरात के आचार्यो ने अपने कुछ मत प्रकट किए ।
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प्रश्नावली से पाप्त उत्तर
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वास्तव में विद्यालय मे अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया में आचार्य और छात्रो के बीच आंतरक्रिया चलती है; अतः इन दोनो का ही विद्यालय होता है । प्रबंध समिती, शासन, प्रधानाचार्य अन्य कर्मचारी अभिभावक ये पाँच घटक पूरक बनना चाहिये ।
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इस वैचारिक स्वरूप की प्रश्नावली पर गुजरात के
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विद्यालय का परिचय गुरु के ही नाम से होता है ऐसी परंपरा भारत मे रही है । वसिष्ठ, सांदिपनी, द्रोणाचार्य इनके गुरुकुल उनके ही नाम से पहचाने जाते थे । टेगोरजी का शान्तिनिकेतन, तिलक जी का न्यूइंग्लिश स्कूल, गांधीजी का बुनियादी विद्यालय रहा है । इसलिए आचार्य और छात्र दोनों का ही विद्यालय अभिप्रेत है ।
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आचार्यो ने अपने कुछ मत प्रकट किए
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प्रबंध समिति भवन आदि व्यवस्था करे । आज शासन अनुदान द्वारा आचार्यों की बेतनपूर्ति , प्रधानाचार्य आचार्यों को शैक्षिक मार्गदर्शन, अन्य कर्मचारी प्रशासकीय व्यवस्थाएँ सम्भालना, अभिभावक विद्यालय की आपूर्ति करना, इसमे सहायक बने । परंतु आज प्रबंध समिति एवं शासन अपना अधिकार जमाने का कार्य करते है
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वास्तव में विद्यालय मे अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया में
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इन सब घटकों का व्यवहारिक स्वरूप के संदर्भ मे प्रबंध समिति एवं शासन विद्यालय के संरक्षक प्रधानाचार्य आचार्य एवं कर्मचारियों के मार्गदर्शक तथा शासन प्रबंध समिती और विद्यालय के बीच सेतू के रूप में कार्य करे, अभिभावक का आचार्यों के साथ आत्मीय सबंध हो । विद्यालय मे श्रद्धा हो ऐसा मत प्रकट हुआ ।
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आचार्य और छात्रो के बीच आंतरक्रिया चलती है; अतः इन
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छात्र का विकास यह बात समान रूप से यह सभी को लागू चाहिये तथा सभी में घनिष्टता होनी चाहिये ।
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दोनो का ही विद्यालय होता है । प्रबंध समिती, शासन,
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==== विमर्श ====
 
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विद्यालय किसका इस प्रश्न पर चर्चा करने से पूर्व हम जरा इस विषय पर भी विचार करें कि विद्यालय किसे कहते हैं । जिस प्रकार मकान घर नहीं होता है, मकान में रहने वाला परिवार घर होता है उस प्रकार केवल मकान विद्यालय नहीं होता है, उसमें होनेवाले अध्ययन, अध्यापन के कारण, उसमें पढने वाले विद्यार्थी और पढ़ाने वाले अध्यापकों के कारण विद्यालय विद्यालय होता है ।
प्रधानाचार्य अन्य कर्मचारी अभिभावक ये पाँच घटक पूरक
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बनना चाहिये ।
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विद्यालय का परिचय गुरु के ही नाम से होता है ऐसी
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परंपरा भारत मे रही है । वसिष्ठ, सांदिपनी, द्रोणाचार्य इनके
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गुरुकुल उनके ही नाम से पहचाने जाते थे । टेगोरजी का
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शान्तिनिकेतन, तिलक जी का न्यूइंग्लिश स्कूल, गांधीजी का
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बुनियादी विद्यालय रहा है । इसलिए आचार्य और छात्र
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दोनों का ही विद्यालय अभिप्रेत है ।
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प्रबंध समिति भवन आदि व्यवस्था करे । आज शासन
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अनुदान द्वारा आचार्यों की बेतनपूर्ति , प्रधानाचार्य आचार्यों को
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शैक्षिक मार्गदर्शन, अन्य कर्मचारी प्रशासकीय व्यवस्थाएँ
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सम्भालना, अभिभावक विद्यालय की आपूर्ति करना, इसमे
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सहायक बने । परंतु आज प्रबंध समिति एवं शासन अपना
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अधिकार जमाने का कार्य करते है ।
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इन सब घटकों का व्यवहारिक स्वरूप के संदर्भ मे
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प्रबंध समिति एवं शासन विद्यालय के संरक्षक प्रधानाचार्य
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आचार्य एवं कर्मचारियों के मार्गदर्शक तथा शासन प्रबंध
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समिती और विद्यालय के बीच सेतू के रूप में कार्य करे,
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अभिभावक का आचार्यों के साथ आत्मीय सबंध हो ।
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विद्यालय मे श्रद्धा हो ऐसा मत प्रकट हुआ ।
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छात्र का विकास यह बात समान रूप से यह सभी को
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लागू चाहिये तथा सभी में घनिष्टता होनी चाहिये ।
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विद्यालय किसका इस प्रश्न पर चर्चा करने से पूर्व हम
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जरा इस विषय पर भी विचार करें कि विद्यालय किसे कहते
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हैं । जिस प्रकार मकान घर नहीं होता है, मकान में रहने
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वाला परिवार घर होता है उस प्रकार केवल मकान विद्यालय
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नहीं होता है, उसमें होनेवाले अध्ययन, अध्यापन के कारण,
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उसमें पढने वाले विद्यार्थी और पढ़ाने
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वाले अध्यापकों के कारण विद्यालय विद्यालय होता है ।
      
इस प्रकार तीन घटकों का मिलकर विद्यालय होता है ।
 
इस प्रकार तीन घटकों का मिलकर विद्यालय होता है ।
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१, शिक्षा का कार्य अर्थात्‌ अध्ययन अध्यापन का कार्य, 2.
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१, शिक्षा का कार्य अर्थात्‌ अध्ययन अध्यापन का कार्य,  
 
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विद्यार्थी और शिक्षक तथा ३. विद्यालय का भवन । इन तीनों
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के एक दूसरे से सम्बन्ध से ही विद्यालय विद्यालय बनता है ।
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विद्यालय के भवन की बात आती है तब और एक
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घटक भी साथ जुड़ता है । वह है संचालक । साथ ही एक
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घटक और भी जुड़ता है । वह है सरकार ।
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विद्यार्थी, शिक्षक, संचालक और सरकार इन चार
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घटकों में विद्यालय किसका होता है ?
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विद्यार्थी कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हम
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उसमें पढते हैं ।
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शिक्षक कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हम उसमें
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पढाते हैं ।
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संचालक कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हमने
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उसे बनाया है ।
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सरकार कहेगी कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हमने उसे
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मान्यता दी है ।
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इस प्रकार सब कहेंगे कि विद्यालय हमारा है । तो फिर
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वास्तव में विद्यालय किसका होता है ?
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कसौटी क्या है ?
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किसी विद्यार्थी पर तथाकथित अन्याय होता है, अथवा
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विद्यार्थी संघकी कोई बात नहीं मानी जाती है तब विद्यार्थी
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आन्दोलन करते हैं, हडताल करते हैं, विरोध प्रदर्शन करते
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2. विद्यार्थी और शिक्षक तथा ३. विद्यालय का भवन । इन तीनों के एक दूसरे से सम्बन्ध से ही विद्यालय विद्यालय बनता है ।
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हैं विरोध प्रदर्शन में पथराव होता है, फर्नीचर तोडा जाता है,
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विद्यालय के भवन की बात आती है तब और एक घटक भी साथ जुड़ता है । वह है संचालक साथ ही एक घटक और भी जुड़ता है । वह है सरकार ।
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विद्यालय को भारी नुकसान पहुँचता है। तब विद्यालय
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विद्यार्थी, शिक्षक, संचालक और सरकार इन चार घटकों में विद्यालय किसका होता है ?
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किसका होता है ? क्या विद्यार्थियों का होता है ? यदि वह
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विद्यार्थी कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हम उसमें पढते हैं ।
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विद्यार्थियों का है तो उसे नुकसान कैसे पहुँचाया जा सकता
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शिक्षक कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हम उसमें पढाते हैं ।
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है ?
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संचालक कहेंगे कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हमने उसे बनाया है ।
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बडे विद्यार्थियों की ही बात क्यों करें ? छोटे विद्यार्थी
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सरकार कहेगी कि विद्यालय हमारा है क्योंकि हमने उसे मान्यता दी है ।
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बेन्च और डेस्क पर कुछ लिखते हैं, पंखों के पंख मरोडते हैं,
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इस प्रकार सब कहेंगे कि विद्यालय हमारा है । तो फिर वास्तव में विद्यालय किसका होता है ?
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स्वीचों को तोडते हैं, दीवारों को गन्दा करते हैं, कूडा कहीं पर
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==== कसौटी क्या है ? ====
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किसी विद्यार्थी पर तथाकथित अन्याय होता है, अथवा विद्यार्थी संघकी कोई बात नहीं मानी जाती है तब विद्यार्थी आन्दोलन करते हैं, हडताल करते हैं, विरोध प्रदर्शन करते हैं । विरोध प्रदर्शन में पथराव होता है, फर्नीचर तोडा जाता है, विद्यालय को भारी नुकसान पहुँचता है। तब विद्यालय किसका होता है ? क्या विद्यार्थियों का होता है ? यदि वह विद्यार्थियों का है तो उसे नुकसान कैसे पहुँचाया जा सकता है ?
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भी फैंकते हैं तब विद्यालय किसका होता है ?
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बडे विद्यार्थियों की ही बात क्यों करें ? छोटे विद्यार्थी बेन्च और डेस्क पर कुछ लिखते हैं, पंखों के पंख मरोडते हैं, स्वीचों को तोडते हैं, दीवारों को गन्दा करते हैं, कूडा कहीं पर भी फैंकते हैं तब विद्यालय किसका होता है ?
    
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