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7. समाज को शिक्षित करने के अपने काम में शिक्षक स्वतंत्र और स्वायत्त होता है। धन या सत्ता उसे नियंत्रित नहीं करते । शिक्षा शिक्षाकाधिष्टित होती है। ऐसी शिक्षा ही समाज का कल्याण कर सकती  है।
 
7. समाज को शिक्षित करने के अपने काम में शिक्षक स्वतंत्र और स्वायत्त होता है। धन या सत्ता उसे नियंत्रित नहीं करते । शिक्षा शिक्षाकाधिष्टित होती है। ऐसी शिक्षा ही समाज का कल्याण कर सकती  है।
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8. शिक्षा यदि स्वायत्त नहीं रही तो वह समाज का मार्गदर्शन करने का अपना कर्तव्य ही नहीं निभा सकती और समाज उससे लाभान्वित नहीं हो सकता । किसी भी समाज के लिए यह इष्ट नहीं है ।
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8. शिक्षा यदि स्वायत्त नहीं रही तो वह समाज का मार्गदर्शन करने का अपना कर्तव्य ही नहीं निभा सकती और समाज उससे लाभान्वित नहीं हो सकता। किसी भी समाज के लिए यह इष्ट नहीं है ।
    
==== समाज का सहयोग ====
 
==== समाज का सहयोग ====
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