Difference between revisions of "बुद्धिमान बीरबल की खिचड़ी"

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एक समय की बात है, आप सभी लोगो ने अकबर और उनके दरबार के नवरत्नों के बारे में जानते ही होंगे | उन सभी में एक मुख्या रत्न थे बीरबर जो बहुत ही बुद्धिमान और शांत स्वभाव के  व्यक्ति थे इसलिए महाराज अकबर अपनी सभी निजी या सामाजिक समस्याए बिना उनके मार्गदर्शन के आगे नहीं बढ़ते थे | एक दिन की बात है ठिठुरती शर्दियों का
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एक समय की बात है, आप सभी लोगो ने अकबर और उनके दरबार के नवरत्नों के बारे में जानते ही होंगे | उन सभी में एक मुख्या रत्न थे बीरबर जो बहुत ही बुद्धिमान और शांत स्वभाव के  व्यक्ति थे इसलिए महाराज अकबर अपनी सभी निजी या सामाजिक समस्याए बिना उनके मार्गदर्शन के आगे नहीं बढ़ते थे | एक दिन की बात है ठिठुरती शर्दियों के दिन थे , सुबह के समय महाराज अपने मंत्री मंडलों के साथ उद्यान में टहल रहे थे, महारज ने कहा इस वर्ष बहुत अधिक ठंडी है| मंत्री ने उत्तर दिया जी महाराज इस वर्ष इतनी अधिक ठण्ड है की कोई अपने घर से बहार भी नहीं निकलना चाहता | आगे चलते हुए एक छोटा सा तालाब था महाराज अकबर ने उस तालाब ने अपना हाथ डाला और सहसा चौक गए पानी इतना ठंडा  था की उंगलिया अकड़ सी गई , अकबर ने बहुत अधिक ठण्ड है कैन इस ठण्ड में मरने के लिए घर से बहार निकलेगा |
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बीरबल चुपच मंत्रियों और महाराज की बाते सुन रहे थे, महाराज अकबर ने बीरबल से पूछा "अरे बीरबल इतने शांत क्यों हो कुछ बोल नहीं रहे हो क्या बात हैं|

Revision as of 17:41, 31 July 2020

एक समय की बात है, आप सभी लोगो ने अकबर और उनके दरबार के नवरत्नों के बारे में जानते ही होंगे | उन सभी में एक मुख्या रत्न थे बीरबर जो बहुत ही बुद्धिमान और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे इसलिए महाराज अकबर अपनी सभी निजी या सामाजिक समस्याए बिना उनके मार्गदर्शन के आगे नहीं बढ़ते थे | एक दिन की बात है ठिठुरती शर्दियों के दिन थे , सुबह के समय महाराज अपने मंत्री मंडलों के साथ उद्यान में टहल रहे थे, महारज ने कहा इस वर्ष बहुत अधिक ठंडी है| मंत्री ने उत्तर दिया जी महाराज इस वर्ष इतनी अधिक ठण्ड है की कोई अपने घर से बहार भी नहीं निकलना चाहता | आगे चलते हुए एक छोटा सा तालाब था महाराज अकबर ने उस तालाब ने अपना हाथ डाला और सहसा चौक गए पानी इतना ठंडा था की उंगलिया अकड़ सी गई , अकबर ने बहुत अधिक ठण्ड है कैन इस ठण्ड में मरने के लिए घर से बहार निकलेगा |

बीरबल चुपच मंत्रियों और महाराज की बाते सुन रहे थे, महाराज अकबर ने बीरबल से पूछा "अरे बीरबल इतने शांत क्यों हो कुछ बोल नहीं रहे हो क्या बात हैं|