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'ध ओपोझीट ओफ क्रिस्ना कोंश्यसनेस ।' कहते हुए राम:रामौ रामा: तक के सभी विभक्ती प्रत्यय सुना दिये । वह बेचारा स्तब्ध रह गया ।
 
'ध ओपोझीट ओफ क्रिस्ना कोंश्यसनेस ।' कहते हुए राम:रामौ रामा: तक के सभी विभक्ती प्रत्यय सुना दिये । वह बेचारा स्तब्ध रह गया ।
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इस भ्रमित लोगों के देश में भारतीय साधुओं ने बराबर अडिंगा जमाया है। मैं एक परिवार में भोजन करने गया था। उस गृहस्थ को मैंने 'हरे रामा हरे क्रिस्ना' के बारे में पूछा । मैं उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा था कि इसमें बहुत धोखाधडी है। आपकी युवा पिढी जिस प्रकार कामधाम छोड कर रास्तों पर भटक रही है वैसे अगर हमारे बच्चे घुमना शुरू करेंगे तो हम उसे पसंद नहीं करेंगे । आप इन धूर्तों पर विश्वास मत किजिये । हिंद धर्म में इस प्रकार अपने कर्तव्य छोड कर घुमते रहने का उपदेश नहीं किया गया है। कभी गुरुवार, एकादशी को भजन वगैरा हो यह ठीक है पर यहाँ की बात उचित नहीं है । आप यह विचित्र आदत बच्चों को न पड़ने दें।'
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इस भ्रमित लोगों के देश में धार्मिक साधुओं ने बराबर अडिंगा जमाया है। मैं एक परिवार में भोजन करने गया था। उस गृहस्थ को मैंने 'हरे रामा हरे क्रिस्ना' के बारे में पूछा । मैं उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा था कि इसमें बहुत धोखाधडी है। आपकी युवा पिढी जिस प्रकार कामधाम छोड कर रास्तों पर भटक रही है वैसे अगर हमारे बच्चे घुमना शुरू करेंगे तो हम उसे पसंद नहीं करेंगे । आप इन धूर्तों पर विश्वास मत किजिये । हिंद धर्म में इस प्रकार अपने कर्तव्य छोड कर घुमते रहने का उपदेश नहीं किया गया है। कभी गुरुवार, एकादशी को भजन वगैरा हो यह ठीक है पर यहाँ की बात उचित नहीं है । आप यह विचित्र आदत बच्चों को न पड़ने दें।'
    
'बुरा मत मानना मिस्टर देशपांडे, पर हमें लगता है कि हशीश या एल.एस.डी के व्यसन से यह व्यसन कम नुकसान देह है। गृहलक्ष्मीने अत्यंत वेदनापूर्ण हृदय से कहा।
 
'बुरा मत मानना मिस्टर देशपांडे, पर हमें लगता है कि हशीश या एल.एस.डी के व्यसन से यह व्यसन कम नुकसान देह है। गृहलक्ष्मीने अत्यंत वेदनापूर्ण हृदय से कहा।
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मनुष्य को अनेक प्रकार की भूख़ होती है। उसमें सेक्स अथवा कामवासना सब से बड़ी भूख है। सभी आकर्षणों में कामाकर्षण अत्यंत प्रभावी है । मोटर से लेकर शौचालयों में प्रयुक्त होनेवाले कागज के बंडल तैयार करनेवाले सभी उत्पादकों ने अपने माल का संबंध काम वासना के साथ जोड दिया है। आपकी कार अत्याधुनिक क्यों चाहिये ?क्यों कि ऐसी कार रखनेवाले को कोई भी सुंदरी आलिंगन देगी। आपकी लिपस्टीक कोई निश्चित प्रकार की क्यों चाहिये । इसलिये की वह देखकर 'वो'आपको प्रगाढ चुंबन करेगा। ये बातें उस चरम पर पहुंची है कि एक विज्ञापन में एक युवक द्वारा युवती को दिये जा रहे आलिंगन का कारण वह हाजमा ठीक करने के लिये कोई निश्चित कंपनी की गोलियाँ ले रही है । अमेरिकन साहित्य में भी प्रथम दो तीन पृष्ठों पर बलात्कार या हत्या का उल्लेख हो ऐसे साहित्य के अनेक संस्करण निकलते हैं।
 
मनुष्य को अनेक प्रकार की भूख़ होती है। उसमें सेक्स अथवा कामवासना सब से बड़ी भूख है। सभी आकर्षणों में कामाकर्षण अत्यंत प्रभावी है । मोटर से लेकर शौचालयों में प्रयुक्त होनेवाले कागज के बंडल तैयार करनेवाले सभी उत्पादकों ने अपने माल का संबंध काम वासना के साथ जोड दिया है। आपकी कार अत्याधुनिक क्यों चाहिये ?क्यों कि ऐसी कार रखनेवाले को कोई भी सुंदरी आलिंगन देगी। आपकी लिपस्टीक कोई निश्चित प्रकार की क्यों चाहिये । इसलिये की वह देखकर 'वो'आपको प्रगाढ चुंबन करेगा। ये बातें उस चरम पर पहुंची है कि एक विज्ञापन में एक युवक द्वारा युवती को दिये जा रहे आलिंगन का कारण वह हाजमा ठीक करने के लिये कोई निश्चित कंपनी की गोलियाँ ले रही है । अमेरिकन साहित्य में भी प्रथम दो तीन पृष्ठों पर बलात्कार या हत्या का उल्लेख हो ऐसे साहित्य के अनेक संस्करण निकलते हैं।
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स्वयंचालित वाहनों ने उन्हे दिया हुआ गति का वरदान अब शाप बन गया है। उस गतिने मनुष्य के मन हावी हो जाने से अब मन का भटकना शुरु है। मेरे मित्रों के घर मैं बच्चों के खिलौने देखता था । 'हमारे बच्चे को हर दिन नया खिलौना चाहिये'ऐसा गर्व के साथ कहनेवाली माताएं मिलती थी। नौकरी करने अमेरिका गये पति के पीछे अमेरिका जाकर सवाई अमेरिकन बनी यह अर्धदग्ध महिलाओं को कहने कि इच्छा होती थी कि अगर ऐसा चला तो आपकी लडकी को कुछ साल बाद प्रतिदिन नये बोयफ्रेंड की भी आवश्यकता पडेगी। कुछ भारतीय अमेरिकन्स वहाँ के लाभ देखकर वहाँ गये पर अब उन्हें धीमे धीमे वहाँ के खतरे भी दिखने लगे हैं।
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स्वयंचालित वाहनों ने उन्हे दिया हुआ गति का वरदान अब शाप बन गया है। उस गतिने मनुष्य के मन हावी हो जाने से अब मन का भटकना शुरु है। मेरे मित्रों के घर मैं बच्चों के खिलौने देखता था । 'हमारे बच्चे को हर दिन नया खिलौना चाहिये'ऐसा गर्व के साथ कहनेवाली माताएं मिलती थी। नौकरी करने अमेरिका गये पति के पीछे अमेरिका जाकर सवाई अमेरिकन बनी यह अर्धदग्ध महिलाओं को कहने कि इच्छा होती थी कि अगर ऐसा चला तो आपकी लडकी को कुछ साल बाद प्रतिदिन नये बोयफ्रेंड की भी आवश्यकता पडेगी। कुछ धार्मिक अमेरिकन्स वहाँ के लाभ देखकर वहाँ गये पर अब उन्हें धीमे धीमे वहाँ के खतरे भी दिखने लगे हैं।
    
न्यूयोर्क के रास्तों पर वह महिला अकेली ही भयग्रस्त नहीं है। यह पूरा समाज भयग्रस्त और दिग्भ्रमित जैसा हो गया है। 'सेल' यहाँ का मूलमंत्र है। चीजें बेचो, बुद्धि बेचो,कला बेचो, कौमार्य बेचो,यौवन बेचो । बिकने लायक नहीं रहता केवल वार्धक्य । और इसी कारण से वह सदंतर निरुपयोगी रहता है। वह किसीको नहीं चाहिये । जिस संस्कृति में 'बेचना' युगधर्म बनता है वहाँ वृद्धावस्था शिवनिर्माल्य नहीं बनता, कुडा कचरा बनता है ।
 
न्यूयोर्क के रास्तों पर वह महिला अकेली ही भयग्रस्त नहीं है। यह पूरा समाज भयग्रस्त और दिग्भ्रमित जैसा हो गया है। 'सेल' यहाँ का मूलमंत्र है। चीजें बेचो, बुद्धि बेचो,कला बेचो, कौमार्य बेचो,यौवन बेचो । बिकने लायक नहीं रहता केवल वार्धक्य । और इसी कारण से वह सदंतर निरुपयोगी रहता है। वह किसीको नहीं चाहिये । जिस संस्कृति में 'बेचना' युगधर्म बनता है वहाँ वृद्धावस्था शिवनिर्माल्य नहीं बनता, कुडा कचरा बनता है ।
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इस बिक्री की पराकाष्ठा जैसी एक बात मेरे एक भारतीय मित्र की पत्नीने कही।
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इस बिक्री की पराकाष्ठा जैसी एक बात मेरे एक धार्मिक मित्र की पत्नीने कही।
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एक भारतीय सज्जन ने अमेरिका में एक बडा बंगला खरीदा । इंस्टंट चाय-कॉफी की तरह ही यहाँ नये मकान भी इंस्टंट देड -दो मास में तैयार हो जाते हैं । खिडकी दरवाजे ही नहीं तो पूरे फर्निचर सहित आपकी गृहस्थी सजा देनेवाले दुकानदार भी यहाँ हैं । अब तो कंप्युटर पर आपकी रुचि-अरुचि का गणित कर आपका मन बहलानेवाली शैयासंगिनी भी उपलब्ध रहती है। यह अतिशयोक्ति नहीं है। आपने मात्र आपकी पसंद का फोर्म भरकर भेजना है। आप जब और जहाँ कहोगे वहाँ जिसी भी प्रकार की आपकी आवश्यकता है उसे पूरी करने के लिये आप की इच्छानुसार कटि-नितंब, वक्ष के नाप वाली सुंदरी उपस्थित । मुझे लगता है कि दुकान में आपकी अर्जी पहुंचते ही दुकानवाला नौकर को कहता होगा, अरे ! इस पते पर अपना सोला नंबर का मोडेल भेज दो । घण्टे के एक सौ डॉलर वाला। शनिवार-रविवार दुगुना किराया लगेगा यह सूचित कर देना ।' हिंदी में पढते समय यह बहुत भयंकर लगेगा पर अंग्रेजी में अत्याधुनिक लगता है ।उस भारतीय सज्जनने अपने घर में वास्तुपूजन किया । मानसिक संतोष के लिये टेपरेकोर्डर पर कुछ मंत्र भी बजाये । बिस्मिल्लाखान की शहनाई का भी वादन हुआ ।इष्टमित्रों को जलेबी भी खिलाई । बेग में भरकर लाये भगवान की पूजा भी हुई होगी। वैसे तो अपने भारतीय लोग अपनी क्षमता के अनुसार अपनी संस्कृति सम्हालते ही हैं। एक घर में तो मैंने दीपप्राकट्य भी देखा था । अमेरिकन लोग मोमबत्ती के - प्रकाश में करते हैं ऐसा दीपक के प्रकाश में होनेवाला असली भारतीय भोजन भी मैंने देखा है । उसमें एक भारतीय भगिनी को दीप की लौ पर सीगरेट सुलगाते देख कर तो पूर्वपश्चिम का यह अपूर्व मिलन देख मेरी आंख से अश्रुधारा बहना ही शेष रहा था । तो इस प्रकार उस सज्जन के घर वास्तुपूजन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । महेमान तृप्त हुए। नये घर की स्वामिनी सहज आनंद से नये कोच पर बैठी थी कि फोन की घण्टी बजी । महिला ने फोन उठाया ।
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एक धार्मिक सज्जन ने अमेरिका में एक बडा बंगला खरीदा । इंस्टंट चाय-कॉफी की तरह ही यहाँ नये मकान भी इंस्टंट देड -दो मास में तैयार हो जाते हैं । खिडकी दरवाजे ही नहीं तो पूरे फर्निचर सहित आपकी गृहस्थी सजा देनेवाले दुकानदार भी यहाँ हैं । अब तो कंप्युटर पर आपकी रुचि-अरुचि का गणित कर आपका मन बहलानेवाली शैयासंगिनी भी उपलब्ध रहती है। यह अतिशयोक्ति नहीं है। आपने मात्र आपकी पसंद का फोर्म भरकर भेजना है। आप जब और जहाँ कहोगे वहाँ जिसी भी प्रकार की आपकी आवश्यकता है उसे पूरी करने के लिये आप की इच्छानुसार कटि-नितंब, वक्ष के नाप वाली सुंदरी उपस्थित । मुझे लगता है कि दुकान में आपकी अर्जी पहुंचते ही दुकानवाला नौकर को कहता होगा, अरे ! इस पते पर अपना सोला नंबर का मोडेल भेज दो । घण्टे के एक सौ डॉलर वाला। शनिवार-रविवार दुगुना किराया लगेगा यह सूचित कर देना ।' हिंदी में पढते समय यह बहुत भयंकर लगेगा पर अंग्रेजी में अत्याधुनिक लगता है ।उस धार्मिक सज्जनने अपने घर में वास्तुपूजन किया । मानसिक संतोष के लिये टेपरेकोर्डर पर कुछ मंत्र भी बजाये । बिस्मिल्लाखान की शहनाई का भी वादन हुआ ।इष्टमित्रों को जलेबी भी खिलाई । बेग में भरकर लाये भगवान की पूजा भी हुई होगी। वैसे तो अपने धार्मिक लोग अपनी क्षमता के अनुसार अपनी संस्कृति सम्हालते ही हैं। एक घर में तो मैंने दीपप्राकट्य भी देखा था । अमेरिकन लोग मोमबत्ती के - प्रकाश में करते हैं ऐसा दीपक के प्रकाश में होनेवाला असली धार्मिक भोजन भी मैंने देखा है । उसमें एक धार्मिक भगिनी को दीप की लौ पर सीगरेट सुलगाते देख कर तो पूर्वपश्चिम का यह अपूर्व मिलन देख मेरी आंख से अश्रुधारा बहना ही शेष रहा था । तो इस प्रकार उस सज्जन के घर वास्तुपूजन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । महेमान तृप्त हुए। नये घर की स्वामिनी सहज आनंद से नये कोच पर बैठी थी कि फोन की घण्टी बजी । महिला ने फोन उठाया ।
    
'अभिनंदन ! हार्दिक अभिनंदन !' उस तरफ से कोई अमेरिकन सजन बोल रहे थे । संभवतः शहर के मेयर का फोन होगा ऐसा सोच कर उनका चहेरा प्रसन्न हुआ। परिश्रमसाध्य अमेरिकी अंग्रेजी में वह बोली,'थेंक यु. आप कौन बोल रहे हैं ?'
 
'अभिनंदन ! हार्दिक अभिनंदन !' उस तरफ से कोई अमेरिकन सजन बोल रहे थे । संभवतः शहर के मेयर का फोन होगा ऐसा सोच कर उनका चहेरा प्रसन्न हुआ। परिश्रमसाध्य अमेरिकी अंग्रेजी में वह बोली,'थेंक यु. आप कौन बोल रहे हैं ?'
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महिला का चहेरा भी उस कल्पना से प्रफुल्ल हो गया ।
 
महिला का चहेरा भी उस कल्पना से प्रफुल्ल हो गया ।
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'ओह हाव नोटी आफ याव' महिला का अमेरिकन अंग्रेजी क्षतिहीन था । भारतीय अंग्रेजी बोलनेवाली महिला के उच्चारण उन्होंने कब के छोड दिये थे। यह औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद महिला ने पूछा, "आप कौन हैं?"उत्तर मिला, 'आपकी सेवा के लिये सदा तत्पर अंतिमविधि कार्यालय का संचालक।'
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'ओह हाव नोटी आफ याव' महिला का अमेरिकन अंग्रेजी क्षतिहीन था । धार्मिक अंग्रेजी बोलनेवाली महिला के उच्चारण उन्होंने कब के छोड दिये थे। यह औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद महिला ने पूछा, "आप कौन हैं?"उत्तर मिला, 'आपकी सेवा के लिये सदा तत्पर अंतिमविधि कार्यालय का संचालक।'
    
'कौन? महिला अपने स्थान से जैसे उछल पडी।'
 
'कौन? महिला अपने स्थान से जैसे उछल पडी।'
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कुछ सुंदर जंगलों में जाकर तंबुओं में रहना, खुले में रहना । पर उन जंगलों में भी छुट्टियों के दिनों में हजारों तंबु लगे रहते हैं । याने वहाँ पर भी वैसी ही भीडभाड । मात्र मन को समझाना कि हम शहर से दूर आये हैं। वहाँ भी पोर्टेबल टीवी हैं। रात रात भर उदंड नाचगान चलते हैं, पर शांति मिलने की एक आशा भी है।
 
कुछ सुंदर जंगलों में जाकर तंबुओं में रहना, खुले में रहना । पर उन जंगलों में भी छुट्टियों के दिनों में हजारों तंबु लगे रहते हैं । याने वहाँ पर भी वैसी ही भीडभाड । मात्र मन को समझाना कि हम शहर से दूर आये हैं। वहाँ भी पोर्टेबल टीवी हैं। रात रात भर उदंड नाचगान चलते हैं, पर शांति मिलने की एक आशा भी है।
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ऐसी इस दिशाहीन घुमक्कड में से ही दुनियाभर मे घुमते अमेरिकन टुरिस्टों का उदय हुआ होगा। 'टुरीझम एक बडा व्यवसाय हो गया है इतना ही नहीं तो अमेरिकन टुरिस्टों को अपने देश में खिंचकर ले जाने की स्पर्धा भी शुरू हुई है। कोई भी प्राचीन इमारत या द्रश्यों को निरंतर अपने केमेरे में कैद करते फिरते ये टूरिस्टों को पागल ही कहा जा सकता है। भारत के स्मशान भी अब 'टुरिस्ट एटेक्शन सेंटर्स' बन चुके हैं । हिंदु अग्निसंस्कार का इन लोगों में अति विकृत आकर्षण है। जहाँ जीवन किट पतंग की तरह है ऐसी झोंपडपट्टियाँ देखने का इन्हें ताजमहाल से भी अधिक आकर्षण है। समृद्ध अमेरिका के लोगों को उसमें न्यू और एक्साइटिंग' कुछ मिल जाता है। उन्हें एक्साइटमेंट कहाँ से मिलेगा यह कहा ही नहीं जा सकता है। एक भारतीय नाटक में एक व्यक्ति शक्कर में से बने हाथी और उंट बेचता है । यहाँ तो मिठाईवाले चोकलेट में से आदमकद मनुष्य बनाते हैं। द्रश्य होता है सोये हुए जीवित मनुष्य जैसा । उसके फटे पेट में आंतें भी रहती है । उसे चीर कर यह मनुष्यभोगी लोग उसका कलेजा, नाक, कान, आँखें खाते हैं।
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ऐसी इस दिशाहीन घुमक्कड में से ही दुनियाभर मे घुमते अमेरिकन टुरिस्टों का उदय हुआ होगा। 'टुरीझम एक बडा व्यवसाय हो गया है इतना ही नहीं तो अमेरिकन टुरिस्टों को अपने देश में खिंचकर ले जाने की स्पर्धा भी शुरू हुई है। कोई भी प्राचीन इमारत या द्रश्यों को निरंतर अपने केमेरे में कैद करते फिरते ये टूरिस्टों को पागल ही कहा जा सकता है। भारत के स्मशान भी अब 'टुरिस्ट एटेक्शन सेंटर्स' बन चुके हैं । हिंदु अग्निसंस्कार का इन लोगों में अति विकृत आकर्षण है। जहाँ जीवन किट पतंग की तरह है ऐसी झोंपडपट्टियाँ देखने का इन्हें ताजमहाल से भी अधिक आकर्षण है। समृद्ध अमेरिका के लोगों को उसमें न्यू और एक्साइटिंग' कुछ मिल जाता है। उन्हें एक्साइटमेंट कहाँ से मिलेगा यह कहा ही नहीं जा सकता है। एक धार्मिक नाटक में एक व्यक्ति शक्कर में से बने हाथी और उंट बेचता है । यहाँ तो मिठाईवाले चोकलेट में से आदमकद मनुष्य बनाते हैं। द्रश्य होता है सोये हुए जीवित मनुष्य जैसा । उसके फटे पेट में आंतें भी रहती है । उसे चीर कर यह मनुष्यभोगी लोग उसका कलेजा, नाक, कान, आँखें खाते हैं।
    
'हाउ एक्साइटिंग !'
 
'हाउ एक्साइटिंग !'
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इस 'हाउ एक्साइटिंग' में से ही सारी समस्याएँ निर्माण होती हैं। कई हत्याएँ मात्र ‘एक्साइटमेंट' के लिये होती है। एक सौंदर्यप्रसाधन गृह में एक युवक गया और और वहाँ बाल बनवा रही आठ- दस महिलाओं को उसने अकारण ही पिस्तौल से मार दिया। उसमें उसे निर्हेतुक आनंद था । अपने देश में दारिद्रय के कारण मृत्यु सस्ती है पर अमेरिका में तो विपुल संपत्ति के कारण मृत्यु सस्ती है । पर वहाँ प्राकृतिक मौत बहुत महंगी है। 'दफन' की बात होते ही वहाँ जिंदा मौत आती है। अपने शुभकार्यों की तरह वहाँ अशुभ कार्य वाले भी प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्तर का सुशोभन उपलब्ध कराते हैं । हमने तो केवल मुर्दा और चेक ही उनके हवाले करना है। शबपेटी, खड्डा, पुष्पहार, तस्वीरें,अखबारों में प्रसिद्धि आदि कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है ।
 
इस 'हाउ एक्साइटिंग' में से ही सारी समस्याएँ निर्माण होती हैं। कई हत्याएँ मात्र ‘एक्साइटमेंट' के लिये होती है। एक सौंदर्यप्रसाधन गृह में एक युवक गया और और वहाँ बाल बनवा रही आठ- दस महिलाओं को उसने अकारण ही पिस्तौल से मार दिया। उसमें उसे निर्हेतुक आनंद था । अपने देश में दारिद्रय के कारण मृत्यु सस्ती है पर अमेरिका में तो विपुल संपत्ति के कारण मृत्यु सस्ती है । पर वहाँ प्राकृतिक मौत बहुत महंगी है। 'दफन' की बात होते ही वहाँ जिंदा मौत आती है। अपने शुभकार्यों की तरह वहाँ अशुभ कार्य वाले भी प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्तर का सुशोभन उपलब्ध कराते हैं । हमने तो केवल मुर्दा और चेक ही उनके हवाले करना है। शबपेटी, खड्डा, पुष्पहार, तस्वीरें,अखबारों में प्रसिद्धि आदि कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है ।
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मुझे लगता है कि अमेरिका में जिंदा रहने से मरना अधिक महंगा है । मृत्यु तो क्या,बीमार पड़ना भी उतना ही महंगा है। उसमें भी बाकी अन्य बीमारियों से भी दाढ का दर्द तो मनुष्य को दिवालिया ही बना देता है। डॉक्टर्स एक- एक दांत के लिये एक-एक हजार रूपिया ( तीस चालीस साल पहले ) लेते हैं । दांत की डॉक्टरी एक प्रतिष्ठित लूट ही है । मेरे एक मित्र की पत्नी का दांत सफाई का बील देखने के बाद तो मुझे लगा कि इतने पैसे में से अपने भारतीय दंतवैद्य ने प्राणी संग्रहालय के सभी मगरमच्छों के दांत भी साफ कर दिये होते । परंतु दंतवैद्य के यहाँ जाना और फिर पार्टीओँ में उसका उल्लेख करना भी बडी प्रतिष्ठा की बात रहती है । जैसे अपने यहाँ-कल ताज में गये थे - वहाँ क्या हुआ उसका कोई महत्त्व नहीं-ताज में लंच के लिये गये यह सुनाना महत्त्वपूर्ण होता है उस प्रकार 'सॉरी, कल तो मैं रमी खेलने नहीं आ सकती, मेरी डेंटीस्ट की एपोइंटमेंट है- यह वाक्य सब के सर पर ठोकना होता है। क्यों कि उस देश में आपका सभी बडप्पन आपकी पासबुक पर ही आधारित रहता है।
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मुझे लगता है कि अमेरिका में जिंदा रहने से मरना अधिक महंगा है । मृत्यु तो क्या,बीमार पड़ना भी उतना ही महंगा है। उसमें भी बाकी अन्य बीमारियों से भी दाढ का दर्द तो मनुष्य को दिवालिया ही बना देता है। डॉक्टर्स एक- एक दांत के लिये एक-एक हजार रूपिया ( तीस चालीस साल पहले ) लेते हैं । दांत की डॉक्टरी एक प्रतिष्ठित लूट ही है । मेरे एक मित्र की पत्नी का दांत सफाई का बील देखने के बाद तो मुझे लगा कि इतने पैसे में से अपने धार्मिक दंतवैद्य ने प्राणी संग्रहालय के सभी मगरमच्छों के दांत भी साफ कर दिये होते । परंतु दंतवैद्य के यहाँ जाना और फिर पार्टीओँ में उसका उल्लेख करना भी बडी प्रतिष्ठा की बात रहती है । जैसे अपने यहाँ-कल ताज में गये थे - वहाँ क्या हुआ उसका कोई महत्त्व नहीं-ताज में लंच के लिये गये यह सुनाना महत्त्वपूर्ण होता है उस प्रकार 'सॉरी, कल तो मैं रमी खेलने नहीं आ सकती, मेरी डेंटीस्ट की एपोइंटमेंट है- यह वाक्य सब के सर पर ठोकना होता है। क्यों कि उस देश में आपका सभी बडप्पन आपकी पासबुक पर ही आधारित रहता है।
    
'सर्वे गुणा :कांचनमाश्रयते' यह ठीक है पर अमेरिका में डॉलर्स शब्द का जितनी अधिक बार उल्लेख होता है उतना कहीं नहीं होता । टीवी पर घण्टों तक हजारों डॉलर्स के इनामों की घोषणाएं चलती रहती है । साहित्य, संगीत, कला सबका मूल्यांकन मिले हुए डॉलर्स के आधार पर ही होता है। इसलिये जीवन की प्रत्येक कृति का पर्यवसान डॉलर्स में ही होता है। यह शिक्षा बचपन से ही मिलती है। पति की जेब से डॉलर्स खतम तो पत्नी भी गई । पिता की जेब से डॉलर्स समाप्त तो बच्चे घर से बाहर । बहुत मिन्नत करके आपको किश्तों पर फ्रिझ, फर्निचर,कार देनेवाले लोग अगर आपकी एक किश्त अनियमित हुई तो पूरे परिवार को घर से रास्ते पर ला देते
 
'सर्वे गुणा :कांचनमाश्रयते' यह ठीक है पर अमेरिका में डॉलर्स शब्द का जितनी अधिक बार उल्लेख होता है उतना कहीं नहीं होता । टीवी पर घण्टों तक हजारों डॉलर्स के इनामों की घोषणाएं चलती रहती है । साहित्य, संगीत, कला सबका मूल्यांकन मिले हुए डॉलर्स के आधार पर ही होता है। इसलिये जीवन की प्रत्येक कृति का पर्यवसान डॉलर्स में ही होता है। यह शिक्षा बचपन से ही मिलती है। पति की जेब से डॉलर्स खतम तो पत्नी भी गई । पिता की जेब से डॉलर्स समाप्त तो बच्चे घर से बाहर । बहुत मिन्नत करके आपको किश्तों पर फ्रिझ, फर्निचर,कार देनेवाले लोग अगर आपकी एक किश्त अनियमित हुई तो पूरे परिवार को घर से रास्ते पर ला देते
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==References==
 
==References==
<references />भारतीय शिक्षा : वैश्विक संकटों का निवारण भारतीय शिक्षा (भारतीय शिक्षा ग्रन्थमाला ५): पर्व २: अध्याय २२, प्रकाशक: पुनरुत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट, लेखन एवं संपादन: श्रीमती इंदुमती काटदरे
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<references />धार्मिक शिक्षा : वैश्विक संकटों का निवारण धार्मिक शिक्षा (धार्मिक शिक्षा ग्रन्थमाला ५): पर्व २: अध्याय २२, प्रकाशक: पुनरुत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट, लेखन एवं संपादन: श्रीमती इंदुमती काटदरे
[[Category:भारतीय शिक्षा ग्रंथमाला 5: पर्व 2: विश्वस्थिति का आकलन]]
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[[Category:धार्मिक शिक्षा ग्रंथमाला 5: पर्व 2: विश्वस्थिति का आकलन]]

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