Difference between revisions of "Livelihood (आजीविका)"
(नया लेख प्रारंभ-आजीविका) |
(No difference)
|
Latest revision as of 19:11, 4 February 2026
| This article needs editing.
Add and improvise the content from reliable sources. |
भारतीय ज्ञान परंपरा में आजीविका अथवा जीवन-वृत्ति मात्र आर्थिक दायित्व न होकर एक विस्तृत नैतिक, सामाजिक और धर्मसंबद्ध अवधारणा है। धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र तथा नीतिग्रंथ इस विषय को कर्तव्य, उत्तरदायित्व और सामाजिक संतुलन के रूप में निरूपित करते हैं। प्रस्तुत लेख में जीवन-वृत्ति की संकल्पना, उसके शास्त्रीय आधार, पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व तथा आधुनिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है।
परिचय
मानव जीवन की निरंतरता का मूल आधार जीवन-वृत्ति है। भारतीय परंपरा में जीविका केवल आत्मनिर्वाह का साधन नहीं, अपितु समाज और परिवार के प्रति उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। भरण-पोषण का प्रश्न तभी उत्पन्न होता है जब व्यक्ति आश्रित संबंधों—जैसे माता-पिता, पत्नी, संतान, वृद्ध एवं दुर्बल जन—के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। शास्त्रों ने इसे धर्म का अनिवार्य अंग माना है।