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References
{{One source}}भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा चाहने वाले सब जानते हैं कि विश्वविद्यालयों से प्राथमिक विद्यालयों तक पढाये जाने वाले विभिन्न विषयों का ज्ञानात्मक स्वरूप भारतीय बनना चाहिये । इन विषयों के पाठ्यक्रम भारतीय जीवनदृष्टि पर आधारित होंगे तभी यह हो सकता है । इस ग्रन्थमाला में ऐसा एक प्राथमिक स्वरूप का प्रयास प्रस्तुत हुआ है। अध्यात्मशास्त्र, धर्मशास्त्र, समाजशास्त्र, गृहशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजशास्त्र, गोविज्ञान, अधिजननशास्त्र, वरवधूचयन और विवाहसंस्कार, विज्ञान और तन्त्रशास्त्र जैसे विषयों के पाठ्यक्रमों की रूपरेखा इस ग्रन्थमाला में दी गई है। रूपरेखा बनाने के लिये विद्यापीठ के कार्यकर्ताओं की एक टोली ने एक अध्ययन यात्रा की और बिकानेर, दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, पुणे आदि स्थानों पर विभिन्न विषयों के विद्वानों के साथ कार्यशालाओं का आयोजन किया । इन कार्यशालाओं में जिनका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और जिनके साथ विमर्श हुआ उनकी सूची यहाँ प्रस्तुत है ।[[File:Capture२०७ .png|none|thumb|644x644px]] 
==References==
<references />भारतीय शिक्षा : वैश्विक संकटों का निवारण भारतीय शिक्षा (भारतीय शिक्षा ग्रन्थमाला ५), प्रकाशक: पुनरुत्थान प्रकाशन सेवा ट्रस्ट, लेखन एवं संपादन: श्रीमती इंदुमती काटदरे
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